संसद में अमित शाह का बड़ा बयान, साउथ में क्यों बढ़ेंगी सीटें?

लोकसभा परिसीमन और महिला आरक्षण: अमित शाह ने दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व पर दी स्पष्टीकरण
संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए परिसीमन से दक्षिण भारत के किसी भी राज्य का राजनीतिक कद कम नहीं होगा, बल्कि वहां की लोकसभा सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी। सरकार की योजना लोकसभा में सीटों की कुल संख्या को बढ़ाकर 850 करने की है, जिसमें आबादी और अन्य मानकों को ध्यान में रखते हुए सीटों का आवंटन किया जाएगा।
सीटों की संख्या में वृद्धि और विपक्ष का रुख
अमित शाह के अनुसार, तमिलनाडु में सीटों की वर्तमान संख्या 39 से बढ़कर 59, कर्नाटक में 28 से 42, आंध्र प्रदेश में 25 से 38 और तेलंगाना में 17 से 26 हो जाएगी। सरकार का तर्क है कि सीटों में 50 प्रतिशत तक की संभावित वृद्धि से दक्षिण भारत के राज्यों का लोकसभा में प्रतिशत अनुपात या तो स्थिर रहेगा या उसमें मामूली बढ़ोत्तरी होगी। इसके विपरीत, विपक्ष का आरोप है कि 2011 के जनगणना डेटा पर आधारित यह परिसीमन संघीय ढांचे के सिद्धांतों को प्रभावित कर सकता है, जिससे उत्तर भारत के राज्यों का प्रभाव बढ़ेगा। विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से अलग करने की मांग की है, ताकि इसे बिना किसी गतिरोध के लागू किया जा सके।
एक नजर में
- केंद्र सरकार ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की घोषणा की है।
- अमित शाह ने स्पष्ट किया कि दक्षिण के राज्यों को सीटों के मामले में कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि वहां प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ेगी।
- विपक्ष का तर्क है कि इस प्रक्रिया से उत्तर भारतीय राज्यों का वर्चस्व बढ़ेगा और संघीय संतुलन बिगड़ सकता है।
- सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण को जोड़कर भविष्य की चुनावी संरचना को व्यवस्थित करने का प्रयास कर रही है।
