आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं: चुनाव आयोग की स्पष्टीकरण

नई दिल्ली: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि आधार कार्ड भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह केवल पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाला दस्तावेज़ है। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में कहा है कि आधार नागरिकता का सबूत नहीं है, बल्कि पहचान के लिए उपयोगी है।”

उन्होंने बताया कि आधार कानून की धारा 9 में साफ तौर पर उल्लेख है कि यह नागरिकता या जन्मतिथि का प्रमाण नहीं माना जा सकता। कुमार ने कहा, “अगर आप नया आधार कार्ड डाउनलोड करेंगे, तो उसमें स्पष्ट रूप से लिखा मिलेगा कि यह जन्मतिथि या नागरिकता का प्रमाण नहीं है।” यह बयान उस समय आया है जब देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष निर्वाचक सूची संशोधन अभियान (SIR) शुरू हो रहा है।

हालांकि, इस बयान के बाद नागरिकों में भ्रम बढ़ा है कि अगर आधार और वोटर कार्ड नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं, तो नागरिकता का असली दस्तावेज़ कौन-सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र सरकार को इस असमंजस को दूर करने के लिए स्पष्ट नीति लानी चाहिए, ताकि आम लोगों को पहचान और नागरिकता से जुड़े मामलों में परेशानी न झेलनी पड़े।