नेपाल में ओली का इस्तीफ़ा, सेना की चुप्पी बनी निर्णायक
काठमांडू में राजनीतिक हलचल ने मंगलवार को बड़ा मोड़ लिया जब नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। यह फैसला ऐसे समय आया जब भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने पूरे देश में ज़ोर पकड़ लिया था और सेना ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक, इस्तीफ़ा देने से पहले ओली ने सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल से सुरक्षा और सहायता की गुहार लगाई थी, लेकिन सेना ने स्पष्ट कर दिया कि वह तभी दखल देगी जब प्रधानमंत्री पद छोड़ देंगे।
प्रदर्शनकारियों के दबाव और मंत्रियों के लगातार इस्तीफ़ों के बीच ओली की स्थिति कमजोर होती गई। राजधानी काठमांडू से लेकर त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक प्रदर्शनकारियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। सोशल मीडिया पर फैली ख़बरों के बाद आंदोलनकारियों ने हवाई अड्डे पर भीड़ जमा कर ड्रोन और लेज़र लाइट से उड़ानों को बाधित करने की कोशिश की, जिससे विमान सेवाएँ ठप पड़ गईं। इन घटनाओं ने सरकार की नाकामी को और उजागर कर दिया।
इस्तीफ़े के बाद अटकलें हैं कि ओली निजी विमान से दुबई रवाना हो सकते हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे चिकित्सकीय दौरा बताया जाएगा। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उपप्रधानमंत्री अस्थायी तौर पर जिम्मेदारी संभाल सकते हैं और आगे सर्वदलीय या अंतरिम सरकार का रास्ता खुल सकता है। नेपाल की राजनीति अब किस दिशा में बढ़ेगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
