लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक गिरा, 12 साल में पहली बार सरकार को लगा बड़ा विधायी झटका!

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक गिरा, 12 साल में पहली बार सरकार को लगा बड़ा विधायी झटका!

महिला आरक्षण (131वां संवैधानिक संशोधन) और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में गिर गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह पिछले 12 वर्षों में पहला अवसर है, जब सदन में पेश कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। मतदान के दौरान विधेयकों के समर्थन में 298 मत पड़े, जबकि विपक्ष के 230 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत की कमी और एनडीए के कुछ सांसदों की अनुपस्थिति इस हार का मुख्य कारण बनी।

राजनीतिक खींचतान और क्षेत्रीय चिंताएं

विपक्ष ने इस कदम को सरकार की राजनीतिक साज़िश करार दिया है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों का आरोप है कि महिला आरक्षण को परिसीमन (डीलिमिटेशन) से जोड़ना दक्षिण भारतीय राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व को कम करने की कोशिश है। विपक्ष के अनुसार, 2023 में महिला आरक्षण बिल पहले ही पारित हो चुका था, ऐसे में इसे नए परिसीमन ढांचे के साथ जोड़कर लाना अनावश्यक था। समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ बताते हुए कहा कि सरकार अपनी मनमानी करने में विफल रही है।

सरकार का पक्ष और चुनावी प्रभाव

दूसरी ओर, भाजपा ने इसे महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह बिल देश की दिशा बदलने वाला था और इसका विरोध करने वालों को राजनीतिक कीमत चुकानी होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए विपक्ष को महिला विरोधी करार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार चुनाव के बीच इस बिल को लाकर महिला वोट बैंक को साधना चाहती थी, ताकि वह भविष्य में विपक्ष पर विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगा सके।

संभावित असर और भविष्य की राह

इस विधेयक के गिरने का सबसे बड़ा प्रभाव परिसीमन प्रक्रिया पर पड़ेगा, जिससे लोकसभा की सीटें 816 तक बढ़ाने का प्रस्ताव था। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत में सीटों की संख्या बढ़ने से भाजपा की स्थिति मजबूत हो सकती थी, जिसे विपक्ष ने ‘इलेक्टोरल मैप’ बदलने की साज़िश माना। फिलहाल, सरकार ने 2023 के पुराने महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन परिसीमन और आरक्षण के नए समीकरणों पर सहमति बनाना अब एक बड़ी चुनौती होगी।

एक झलक में

  • लोकसभा में बहुमत की कमी के कारण 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक गिर गया।
  • मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में पहली बार कोई सरकारी संवैधानिक संशोधन विधेयक सदन में विफल हुआ।
  • विपक्ष ने परिसीमन को दक्षिण भारतीय राज्यों के हक पर हमला और राजनीतिक स्टंट बताया।
  • सरकार ने तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए 2023 के महिला आरक्षण कानून की अधिसूचना जारी की।