फाइलों में सिमटा पॉश कानून और असुरक्षित कामकाजी महिलाएं!

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक स्थित कार्यालय में यौन उत्पीड़न के हालिया मामलों ने कॉरपोरेट जगत में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत में ‘प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट’ (POSH) कानून के तहत हर संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आती है। वित्त वर्ष 2025 में बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में शिकायतों में हुई 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि कार्यस्थलों पर संवेदनशीलता की भारी कमी है और कानून का क्रियान्वयन महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है।
कॉरपोरेट उदासीनता और संसाधनों का अभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि कई कंपनियां पॉश प्रशिक्षण को आवश्यक सुरक्षा उपाय के बजाय एक ‘अतिरिक्त खर्च’ और समय की बर्बादी के रूप में देखती हैं। कई मामलों में समितियां केवल कागजों पर मौजूद होती हैं और शिकायत मिलने पर ही सक्रिय होती हैं, जबकि कानून का मूल उद्देश्य ऐसी घटनाओं की रोकथाम करना है। जागरूकता की कमी और प्रबंधन के पूर्वाग्रह के कारण अक्सर महिला कर्मचारियों को करियर के नुकसान का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता है या मामले को आपस में सुलझाने का दबाव बनाया जाता है।
असंगठित क्षेत्र और प्रभावशाली आरोपियों का दबदबा
असंगठित क्षेत्र में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां जिला स्तर की स्थानीय समितियों (LC) तक पहुंचना घरेलू कामगारों और छोटे संस्थानों की महिलाओं के लिए लगभग नामुमकिन है। वहीं, संगठित क्षेत्र में यदि आरोपी किसी वरिष्ठ या प्रभावशाली पद पर होता है, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद धूमिल हो जाती है। जब तक कंपनियां महिला कर्मचारियों को ‘परेशानी’ समझने के बजाय एक सुरक्षित कार्यस्थल प्रदान करने को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाएंगी, तब तक कानून की प्रभावशीलता सीमित ही रहेगी।
एक झलक में
- टीसीएस नासिक मामले के बाद आईटी क्षेत्र और अन्य कंपनियों में पॉश कानून के अनुपालन के ऑडिट की मांग तेज हुई है।
- सूचीबद्ध कंपनियों में यौन उत्पीड़न की शिकायतों में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़ती असुरक्षा की ओर संकेत करती है।
- कई संस्थान पॉश ट्रेनिंग और आंतरिक समितियों के गठन को महज एक कानूनी बोझ मानकर उनकी अनदेखी कर रहे हैं।
- असंगठित क्षेत्र की 96 प्रतिशत महिला कामगारों के लिए स्थानीय शिकायत समितियों तक पहुंच और जागरूकता का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
