नोएडा में श्रमिक आंदोलन के बाद श्रम विभाग का बड़ा प्रहार, 20 कंपनियों के ठेकेदारों पर करोड़ों का जुर्माना!

नोएडा में श्रमिक आंदोलन के बाद श्रम विभाग का बड़ा प्रहार, 20 कंपनियों के ठेकेदारों पर करोड़ों का जुर्माना!

ग्रेटर नोएडा में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन के बाद श्रम विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। विभाग ने जांच में पाया कि 24 कंपनियों के करीब 203 ठेकेदारों ने श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए श्रमिकों को उनके वास्तविक लाभों से वंचित रखा। इस मामले में ठेकेदारों की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए प्रशासन ने 20 प्रमुख कंपनियों के संविदाकारों को नोटिस जारी कर 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि श्रमिकों को लौटाने के निर्देश दिए हैं।

लाइसेंस रद्द और ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी

अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी के अनुसार, जिन ठेकेदारों ने नियमों की अनदेखी की है, उनके खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण और फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कई स्तरों पर श्रमिकों के हितों को नजरअंदाज किया गया, जिसके कारण औद्योगिक अशांति पैदा हुई। अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित प्रधान सेवायोजक की होगी।

नया वेतन ढांचा और सख्त वसूली नियम

गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है। नए नियमों के तहत अब हर महीने की 10 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य है और ईएसआई व पीएफ के अलावा किसी भी अन्य तरह की कटौती को अवैध माना जाएगा। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना और मजदूरों के आर्थिक शोषण पर लगाम लगाना है ताकि भविष्य में हिंसक प्रदर्शनों जैसी नौबत न आए।

एक झलक में

  • श्रम विभाग ने 203 ठेकेदारों को 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली का नोटिस भेजा।
  • वेतन बढ़ोतरी और श्रम कानूनों के उल्लंघन को लेकर 24 कंपनियों पर हुई बड़ी कार्रवाई।
  • नियमों की अनदेखी करने वाली फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने और लाइसेंस रद्द करने के आदेश।
  • नोएडा-गाजियाबाद में वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि लागू, हर महीने 10 तारीख तक देना होगा भुगतान।