आरबीआई नीति पर टिकी नजरें, क्या घटेगी ईएमआई?

नई दिल्ली। 1 अक्टूबर को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपनी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक से ब्याज दरों पर फैसला सुनाएगा। इस बार आम लोगों की उम्मीदें खास तौर पर जुड़ी हैं, क्योंकि साल 2025 में पहले ही टैक्स छूट और सस्ती लोन दरों ने राहत दी है। अब सवाल यह है कि क्या दिवाली से पहले एक और गिफ्ट के तौर पर ईएमआई कम हो सकती है?

हालांकि, रॉयटर्स के ताज़ा पोल ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है। सर्वे के अनुसार, आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर की बैठक में अपनी रेपो रेट 5.50 फीसदी पर ही बनाए रखेगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल पिछली दर कटौतियों के असर का आकलन कर रहा है। भारत की जीडीपी 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी है, लेकिन निजी निवेश अब भी कमजोर है। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट और आयात की बढ़ती लागत भी चिंता का कारण है।

जानकारों का मानना है कि फिलहाल किसी बदलाव की संभावना नहीं है। केनरा बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट माधवनकुट्टी ने कहा, “दरें घटने की संभावना बहुत कम है क्योंकि प्राइवेट निवेश में अभी तक सुधार नहीं दिखा।” रॉयटर्स सर्वे में शामिल 61 अर्थशास्त्रियों में से तीन-चौथाई ने भी ब्याज दरों को स्थिर रहने का अनुमान जताया है। ऐसे में आम जनता की नजरें अब पूरी तरह आरबीआई के फैसले पर टिकी हैं।