सरकार के सुधार से HAL में नई रफ्तार, समय पर मिलेंगे विमान

सरकार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के कामकाज में बड़े सुधार की योजना बना रही है। उद्देश्य यह है कि कंपनी समय पर भारतीय वायु सेना और अन्य सशस्त्र बलों को लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर उपलब्ध करा सके। वर्तमान में HAL के पास करीब ₹2.7 लाख करोड़ के ऑर्डर लंबित हैं, जो उसकी वार्षिक आय से आठ गुना अधिक हैं। इस भारी दबाव के चलते डिलीवरी में देरी हो रही है, खासतौर पर लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की आपूर्ति से वायुसेना असंतुष्ट है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, HAL की मौजूदा संरचना इतनी जटिल है कि वह एक साथ उत्पादन और नई तकनीक वाले प्रोजेक्ट, जैसे AMCA (एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट), पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस देरी को नहीं रोका गया तो भारत की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण सरकार ने एक बाहरी सलाहकार कंपनी को शामिल किया है, जो HAL की संरचना और कामकाज का मूल्यांकन कर रही है।

बदलाव की संभावनाओं में HAL को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना शामिल है—जैसे एक इकाई सिर्फ जेट विमान बनाए, दूसरी हेलीकॉप्टर, और तीसरी मरम्मत व सर्विसिंग पर काम करे। जानकारों का मानना है कि इससे उत्पादन क्षमता में तेजी आएगी और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होगी। सरकार और HAL के वरिष्ठ अधिकारी मिलकर इसका रोडमैप तैयार कर रहे हैं। यदि योजना सफल होती है तो भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता नई ऊँचाइयों पर पहुँच सकती है।