जेलेंस्की का भारत पर डीजल संदेह, बढ़ी जांच सख्ती
भारत और यूक्रेन के बीच ऊर्जा व्यापार में नया तनाव उभर आया है। यूक्रेन ने घोषणा की है कि 1 अक्टूबर से भारत से आने वाले हर डीजल खेप की जांच की जाएगी। यह कदम रूस से कच्चा तेल खरीदने में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए उठाया गया है। यूक्रेन का दावा है कि उसकी सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि भारतीय डीजल में रूसी कच्चे तेल की मिलावट हो सकती है।
यूक्रेन की प्रमुख ऊर्जा कंसल्टेंसी एनकॉर के मुताबिक, यह निर्णय सीधे तौर पर युद्धकालीन सुरक्षा जरूरतों से जुड़ा है। हाल ही में, भारत से खरीदे गए डीजल की हिस्सेदारी यूक्रेन के कुल आयात में करीब 18% रही थी। वहीं दूसरी कंसल्टेंसी A-95 का कहना है कि रक्षा मंत्रालय तक को भारतीय डीजल खरीदना पड़ा क्योंकि यह पुराने सोवियत मानकों पर खरा उतरता था। बावजूद इसके, अब युद्ध के खिंचने और रूस पर अविश्वास बढ़ने से यूक्रेन अतिरिक्त सतर्क हो गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह सख्ती भारत के लिए आर्थिक झटका हो सकती है। भारत, रूस से सस्ते यूराल ग्रेड क्रूड की भारी खरीद कर उसे प्रोसेस कर दुनिया भर में बेच रहा है। हालांकि यूक्रेन का यह कदम केवल व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। ऊर्जा आपूर्ति की जंग में यह साफ है कि डीजल सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि भू-राजनीति का अहम हथियार बन चुका है।
