लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण संशोधन विधेयक, साथ ही टल गए परिसीमन सहित दो अन्य महत्वपूर्ण बिल!

लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण संशोधन विधेयक, साथ ही टल गए परिसीमन सहित दो अन्य महत्वपूर्ण बिल!

शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पारित नहीं हो सका। केंद्र सरकार के प्रयासों के बावजूद इस विधेयक को सदन में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हुआ। मतदान के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि पारित होने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी। मुख्य विधेयक के गिरने के कारण सरकार ने इससे जुड़े अन्य विधायी कार्यों को भी फिलहाल रोक दिया है।

अटक गए सहयोगी विधेयक

मुख्य संशोधन विधेयक के पारित न होने का सीधा असर ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर पड़ा है। सरकार ने इन दोनों विधेयकों को चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया था, लेकिन अब इन्हें आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया गया है। सरकार का तर्क है कि जब मूल आधार यानी मुख्य संशोधन विधेयक ही स्वीकृत नहीं हुआ, तो उससे जुड़े अन्य कानूनी प्रावधानों को पेश करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

भविष्य की योजनाओं पर प्रभाव

इन विधेयकों के अटकने से विशेष रूप से दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। ‘संघ राज्य विधि विधेयक’ इन्हीं क्षेत्रों में आरक्षण के प्रावधानों को विस्तार देने के लिए जरूरी था। इस विधायी विफलता के कारण 2029 के संसदीय चुनावों से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की योजना को बड़ा झटका लगा है, जिससे भविष्य में परिसीमन और चुनावी प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी का मामला फिर से अधर में लटक गया है।

एक झलक में

  • लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण महिला आरक्षण संशोधन विधेयक हुआ खारिज।
  • मुख्य बिल गिरने के बाद सरकार ने परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पेश नहीं किया।
  • पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि जीत के लिए 352 मतों की थी दरकार।
  • इस विफलता से 2029 के चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने की समयसीमा पर अनिश्चितता के बादल।