जेनेरिक दवाखाना खोलकर शुरू करें अपना रोजगार और कमाएं मोटा मुनाफा!

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं के बढ़ते खर्चों के बीच प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जनता को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराना है। वर्तमान में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में जेनेरिक दवाएं 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं, जिसके कारण बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। यह न केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में राहत दे रहा है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार का एक शानदार अवसर भी बन गया है।
अनिवार्य योग्यता और स्थान
एक जनऔषधि केंद्र या जेनेरिक दवाखाना खोलने के लिए आवेदक के पास बी.फार्मा (B.Pharma) या डी.फार्मा (D.Pharma) की डिग्री होना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति खुद पढ़ा-लिखा नहीं है, तब भी वह किसी पंजीकृत फार्मासिस्ट को नियुक्त कर इस केंद्र को संचालित कर सकता है। इसके लिए कम से कम 120 वर्ग फुट की साफ-सुथरी जगह की आवश्यकता होती है। साथ ही, नियमानुसार रिटेल ड्रग लाइसेंस लेना और बिलिंग के लिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की सामान्य जानकारी होना भी अनिवार्य है।
सरकारी सहायता और आकर्षक मुनाफा
जेनेरिक दवाखाने का सबसे बड़ा आकर्षण इसमें मिलने वाली वित्तीय मदद और मार्जिन है। सरकार इस केंद्र को स्थापित करने के लिए करीब 2.5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। दवाइयों की बिक्री पर सीधे तौर पर 20 प्रतिशत का मार्जिन मिलता है और मासिक बिक्री के आधार पर 10 से 15 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन (इंसेंटिव) भी दिया जाता है। कम निवेश में अधिक ग्राहकों की आवक के कारण यह मॉडल आर्थिक रूप से काफी मजबूत माना जा रहा है।
एक झलक में
- जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती उपलब्ध होती हैं।
- केंद्र खोलने के लिए बी.फार्मा या डी.फार्मा डिग्री धारक फार्मासिस्ट का होना अनिवार्य है।
- सरकार की ओर से 2.5 लाख रुपये तक की मदद और बिक्री पर 20 प्रतिशत मार्जिन का प्रावधान है।
- कम से कम 120 वर्ग फुट जगह के साथ आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
