इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 29 साल बाद करंट पीड़ित को मिलेगा करोड़ों का न्याय

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 29 साल बाद करंट पीड़ित को मिलेगा करोड़ों का न्याय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने न्याय की एक मिसाल पेश करते हुए उत्तर प्रदेश बिजली विभाग को 11,000 वोल्ट के करंट की चपेट में आकर अपने दोनों हाथ गंवाने वाले व्यक्ति को भारी मुआवजा देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने 15 अप्रैल को दिए फैसले में पीड़ित पप्पू को 26.65 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। यह राशि 30 मई 1997 से भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दी जाएगी, जिससे कुल राशि ब्याज सहित कई गुना बढ़ जाएगी।

यह घटना मार्च 1997 की है, जब आगरा के नागला पाड़ी निवासी पप्पू महज सात वर्ष की आयु में एक प्राथमिक विद्यालय के पास खेल रहा था। सुरक्षा घेराबंदी न होने के कारण वह दुर्घटनावश हाई वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर की चपेट में आ गया था। इस हादसे में वह इतना गंभीर रूप से झुलसा कि डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए दोनों हाथ काटने पड़े। बिजली विभाग की यह लापरवाही एक मासूम बच्चे के भविष्य पर भारी पड़ी।

अधीनस्थ अदालत का फैसला पलटा

पीड़ित के पिता द्वारा दायर मुआवजे की अर्जी को साल 2005 में एक निचली अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि घटना बच्चे की लापरवाही की वजह से हुई। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस तर्क को नकारते हुए विभाग की चूक को मुख्य कारण माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि विभाग की सुरक्षा व्यवस्था में कमी के कारण ही यह हादसा हुआ और पीड़ित इस मुआवजे के साथ-साथ मुकदमे व अपील पर हुए खर्च का भी हकदार है।

इस फैसले का गहरा प्रभाव भविष्य के बिजली दुर्घटना मामलों पर पड़ेगा। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड को एक महीने के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। समय पर भुगतान न होने की स्थिति में पीड़ित को विभाग के विरुद्ध वसूली की कार्रवाई शुरू करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। यह आदेश न केवल पीड़ित के लिए आर्थिक संबल है, बल्कि सरकारी विभागों की जवाबदेही भी तय करता है।

एक झलक में

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करंट पीड़ित को 26.65 लाख रुपये मुआवजा और 6% ब्याज देने का आदेश दिया।
  • 1997 में आगरा में 7 साल की उम्र में हाई वोल्टेज करंट से बच्चे ने गंवाए थे दोनों हाथ।
  • अदालत ने निचली अदालत का वह फैसला पलटा जिसमें बच्चे को हादसे के लिए जिम्मेदार माना गया था।
  • बिजली विभाग को एक महीने के भीतर मुआवजे और मुकदमे के खर्च का भुगतान करना होगा।