राहुल गांधी को अपनी बहन प्रियंका से सीखना चाहिए, संसद में अमित शाह का तीखा प्रहार!

राहुल गांधी को अपनी बहन प्रियंका से सीखना चाहिए, संसद में अमित शाह का तीखा प्रहार!

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला। शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सदन में व्यवहार पर तीखी आपत्ति जताते हुए उन्हें अपनी बहन प्रियंका गांधी से सीखने की सलाह दी। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों और उनके पूर्व के आचरण को संसदीय गरिमा के प्रतिकूल बताया। शाह ने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण के मार्ग में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मोदी सरकार इस संकल्प को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

महिला आरक्षण और परिसीमन की आवश्यकता

अमित शाह ने कहा कि जो दल आज आरक्षण की वकालत कर रहे हैं, वही पिछले 30 वर्षों से इसे रोकने के जिम्मेदार हैं। उन्होंने परिसीमन को संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें बढ़ाने के लिए यह अनिवार्य है। शाह के अनुसार, देश की जनसंख्या 1976 के मुकाबले कहीं अधिक बढ़ चुकी है और कई लोकसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या 48 लाख तक पहुंच गई है, जिससे जनसंपर्क कठिन हो गया है। बिना सीटें बढ़ाए आरक्षण देने से दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है, जिसे सरकार टालना चाहती है।

जाति जनगणना और विपक्ष पर आरोप

विपक्ष द्वारा जाति जनगणना रोकने के आरोपों को खारिज करते हुए गृह मंत्री ने घोषणा की कि जनगणना का कार्य शुरू हो चुका है और आजादी के बाद पहली बार जातियों की भी गणना की जाएगी। उन्होंने कांग्रेस को ओबीसी विरोधी बताते हुए कहा कि आंकड़े आने के बाद संसद की सहमति से ओबीसी हितों पर निर्णय लिया जाएगा। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विवाद पैदा कर देश को बांटने की साजिश कर रहा है, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।

एक झलक में

  • अमित शाह ने राहुल गांधी के असंसदीय व्यवहार की आलोचना करते हुए उन्हें प्रियंका गांधी से सीखने की नसीहत दी।
  • गृह मंत्री ने महिला आरक्षण में देरी के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराया।
  • 2027 के परिसीमन के बाद ही 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण प्रभावी रूप से लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
  • देश में पहली बार जाति जनगणना कराने और एससी-एसटी सीटों को जनसंख्या के अनुपात में बढ़ाने पर जोर दिया।