महिला आरक्षण के बहाने विपक्ष को घेरने की तैयारी में जुटी भाजपा, बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में बनेगा बड़ा मुद्दा

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण मिली हार को भाजपा ने एक बड़े राजनीतिक अवसर में बदलने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में अपने भाषणों के जरिए आगामी चुनावों के लिए नई बिसात बिछा दी है। पार्टी इस हार को ‘विपक्ष के महिला विरोधी चेहरे’ के रूप में पेश करने की योजना बना रही है, ताकि देश की आधी आबादी के बीच अपनी पैठ और मजबूत की जा सके।
हार को जीत में बदलने की रणनीति
भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दल अब इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। विधेयक गिरने के तुरंत बाद राजग की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आने वाले दिनों में देश भर में विपक्षी नेताओं के आवासों का घेराव करने और बड़े पैमाने पर धरने देने की योजना बनाई गई है। पार्टी का मानना है कि इस विफलता को जनता के बीच ले जाकर वे विपक्षी दलों पर महिला सशक्तिकरण की राह में रोड़ा अटकाने का ठप्पा लगा सकते हैं।
चुनावी पिच और भविष्य के लक्ष्य
इस रणनीति का तत्काल प्रभाव पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मौजूदा विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा, जहाँ भाजपा इसे एक प्रखर चुनावी मुद्दा बनाएगी। पार्टी इसे सिर्फ तात्कालिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक जीवित रखना चाहती है। जिस तरह आपातकाल के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा जाता रहा है, उसी तर्ज पर भाजपा महिला आरक्षण के गिरने को विपक्ष की ऐतिहासिक भूल के रूप में स्थापित करने की कोशिश करेगी ताकि भविष्य में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया जा सके।
विपक्ष के तर्क और राजनीतिक टकराव
दूसरी ओर, विपक्ष का आरोप है कि सरकार की मंशा विधेयक पारित कराने से ज्यादा राजनीति करने की थी। विपक्षी दलों के अनुसार, सरकार ने संवाद और सर्वदलीय बैठक के सुझावों को नजरअंदाज किया और टकराव का रास्ता चुना। हालांकि, भाजपा का मानना है कि बहुमत की कमी के बावजूद इस विधेयक को लाकर उन्होंने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है और अब गेंद जनता के पाले में है, जो भविष्य के चुनावों में इसका फैसला करेगी।
एक झलक में
- लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को दो-तिहाई बहुमत न मिलने के बाद भाजपा ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया है।
- पार्टी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ बताकर घेरेगी।
- राजग की महिला सांसदों द्वारा विपक्षी नेताओं के आवासों के घेराव और देशव्यापी प्रदर्शन की योजना तैयार की गई है।
- इस विफलता का उपयोग 2029 के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए भावनात्मक पिच के रूप में किया जाएगा।
