बिना मेकअप के खुद बनाती थीं भोग और चटाती थीं खास पकवान! सुचिता सेन के आलीशान बंगले की पूजा!

बिना मेकअप के खुद बनाती थीं भोग और चटाती थीं खास पकवान! सुचिता सेन के आलीशान बंगले की पूजा!

टॉलीवुड के दो सबसे चमकते और अमर सितारे—उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन। जिस प्रकार महाननायक उत्तम कुमार के घर पर भव्य रूप से कोजागरी लक्ष्मी पूजा का आयोजन किया जाता था, ठीक उसी तरह बलीगंज स्थित अपने आलीशान आवास पर लक्ष्मी पूजा की आराधना करने में महानयिका सुचित्रा सेन भी किसी से पीछे नहीं थीं। रंगीन दुनिया के तमाम चकाचौंध और स्टारडम से कोसों दूर, घर के बंद दरवाजों के भीतर वह किस तरह एक आम और मिट्टी से जुड़ी गृहणी बन जाती थीं, उसकी यह कहानी आज भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

बाहरी फिल्मी दुनिया और मीडिया उन्हें मुख्य रूप से ‘मैडम सेन’ के रूप में ही जानती थी। इंडस्ट्री के कई लोगों का मानना था कि वह काफी स्वाभिमानी, गंभीर और एकांतप्रिय व्यक्तित्व की थीं। लेकिन जिन लोगों ने महानयिका को बहुत करीब से देखा था, वे अच्छी तरह जानते थे कि इस बाहरी छवि के ठीक विपरीत उनके भीतर एक बेहद सरल इंसान बसता था। निर्देशकों या सहकर्मियों के साथ वह भले ही एक निश्चित दूरी बनाकर रखती थीं, लेकिन अपने परिवार और बेहद करीबी लोगों के बीच वह एक स्नेहमयी मां और कमाल की कुशल गृहिणी थीं।

अतिथि सत्कार के मामले में सुचित्रा सेन का कोई मुकाबला नहीं था। उनके घर कोई भी मेहमान आता, तो वह अपने हाथों से स्वादिष्ट पकवान बनाकर उन्हें खिलाती थीं। विशेष तौर पर उनके हाथों की बनी शाकाहारी डिशेज और बेहद स्वादिष्ट चच्चड़ी (सब्जी) उनके करीबियों के बीच बहुत मशहूर थी। घर के अंदर वह सूती की साधारण साड़ी और बिना किसी मेकअप के बेहद सादगी भरा जीवन जीना पसंद करती थीं। बाहरी दिखावा और कृत्रिम ग्लैमर उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं था।

लेकिन बेहद साधारण जीवनशैली जीने के बावजूद, कोजागरी लक्ष्मी पूजा के पावन दिन सुचित्रा का पूरा अंदाज बदल जाता था। उस एक खास दिन वह खुद मां लक्ष्मी के रूप में सज-धज कर तैयार होती थीं—उनके शरीर पर लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी और पारंपरिक सोने के आभूषण होते थे। सिर्फ खुद को ही नहीं, बल्कि वह मां लक्ष्मी की प्रतिमा को भी अपने हाथों से सजाती थीं। उनकी कलात्मक और सजी हुई वह प्रतिमा बिल्कुल जीवंत प्रतीत होती थी।

पूजा की सारी तैयारियां और व्यवस्थाएं सुचित्रा खुद अपने कंधों पर संभालती थीं। पूरा दिन निर्जला उपवास रखकर अपने हाथों से फल और सब्जियां काटना और पूजा की हर एक सामग्री जुटाना, यह सब वह बेहद श्रद्धा से करती थीं। इस पवित्र कार्य में उनकी बेटी मुनमुन सेन उनका पूरा साथ देती थीं। मुनमुन बचपन से ही बहुत अच्छी चित्रकार थीं, इसलिए मां के खास निर्देश पर पूरे घर के फर्श पर खूबसूरत अल्पना (रंगोली) बनाने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होती थी।

कहा जाता है कि सुचित्रा सेन ने सपने में मां लक्ष्मी के दर्शन किए थे, जिसके बाद उन्होंने अपने घर पर इस विशेष पूजा की शुरुआत की थी। उसी दिव्य स्वप्न को साकार करते हुए हर साल उनके घर में भव्यता के साथ पूजा संपन्न होती थी। टॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकार उत्तम कुमार के घर की पूजा के बाद सुचित्रा के घर पहुंचते थे। इस पूरे आयोजन का सबसे आकर्षक हिस्सा यह होता था कि पूजा संपन्न होने के बाद उस विशालकाय लक्ष्मी प्रतिमा को नाव में रखकर गंगा में विसर्जन करने के लिए खुद महानयिका घाट पर मौजूद रहती थीं। कैमरों की फ्लैशलाइट और पब्लिसिटी से कोसों दूर, महानयिका के घर के अंदर की वह लक्ष्मी पूजा आज भी बंगाली सिनेमा के इतिहास का एक स्वर्णिम और अविस्मरणीय अध्याय बनी हुई है।

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