बंगाल चुनाव प्रचार से राहुल और प्रियंका की रहस्यमयी दूरी क्या किसी बड़ी डील का संकेत है!

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है क्योंकि कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में बंगाल से दूरी बना ली है। दिल्ली में इंडिया गठबंधन की एकजुटता और बंगाल के मैदान में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुप्पी यह संकेत दे रही है कि परदे के पीछे कोई नई खिचड़ी पक रही है।
दिल्ली में दोस्ती और बंगाल में दूरी सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच बढ़ती बातचीत और अभिषेक बनर्जी को राहुल गांधी के धन्यवाद के बाद बंगाल कांग्रेस के तेवर नरम पड़ गए हैं। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी अब ममता बनर्जी की पार्टी को कमजोर नहीं करना चाहते ताकि भाजपा विरोधी वोट न बंटें। यही कारण है कि प्रियंका गांधी के बंगाल दौरे रद्द कर दिए गए हैं और मल्लिकार्जुन खड़गे का पूरा ध्यान सिर्फ भाजपा पर केंद्रित है।
अधीर रंजन चौधरी की बढ़ी मुश्किलें हाईकमान के इस बदले हुए रुख ने प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को धर्मसंकट में डाल दिया है। ममता बनर्जी के मुखर विरोधी माने जाने वाले अधीर अब अपने ही गढ़ बहरामपुर में अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं। दिल्ली की ‘नरम’ नीति और स्थानीय स्तर पर ‘कठोर’ विरोध के बीच तालमेल बिठाना कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
एक नजर में
- राहुल और प्रियंका गांधी ने बंगाल में अपने चुनावी कार्यक्रम रद्द कर तृणमूल के प्रति नरम रुख का संकेत दिया।
- कांग्रेस हाईकमान भाजपा विरोधी वोटों के ध्रुवीकरण को रोकने के लिए बंगाल में सक्रिय प्रचार से बच रहा है।
- इस रणनीतिक बदलाव से अधीर रंजन चौधरी जैसे स्थानीय कद्दावर नेता अपनी ही पार्टी में असहज स्थिति में हैं।
