पश्चिम एशिया में शांति की नई किरण, क्या पाकिस्तान में खत्म होगी अमेरिका और ईरान की पुरानी रंजिश!

पश्चिम एशिया में शांति की नई किरण, क्या पाकिस्तान में खत्म होगी अमेरिका और ईरान की पुरानी रंजिश!

पश्चिम एशिया में जारी लंबे संघर्ष और तनाव के बीच शांति की एक बड़ी उम्मीद जागती दिख रही है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आगामी सोमवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस चर्चा में शामिल होने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधि दल रविवार को ही इस्लामाबाद पहुँच सकते हैं। दशकों पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़कर दोनों देशों का फिर से मेज पर आना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।

शांति के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता

इस कूटनीतिक हलचल के पीछे पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका नजर आ रही है। हाल ही में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपना पूर्ण समर्थन दिया है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने तेहरान में ईरानी नेतृत्व के साथ मुलाकात की है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक ठोस समझौते तक पहुँचना और क्षेत्रीय तनाव को कम करना है।

युद्धविराम और भविष्य की रणनीति

क्षेत्र में शांति की इन कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजरायल और हिजबुल्ला के बीच 10 दिनों के युद्धविराम की घोषणा ने माहौल को और अधिक सकारात्मक बना दिया है। लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष को रोकने की यह पहल बड़े शांति समझौते की दिशा में पहला कदम मानी जा रही है। इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक से न केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों में जमी बर्फ पिघल सकती है, बल्कि इससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति में व्यापक सुधार की संभावना है।

एक झलक में

  • अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि सोमवार को इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए आमने-सामने होंगे।
  • पाकिस्तान की पहल को तुर्की और कतर जैसे देशों का मजबूत कूटनीतिक समर्थन मिला है।
  • राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल और हिजबुल्ला के बीच 10 दिनों के युद्धविराम का ऐलान किया है।
  • मुख्य ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता को खत्म करने पर रहेगा।