डॉलर के साम्राज्य को झटका देकर अब चीनी मुद्रा युआन में तेल बेचेगा संयुक्त अरब अमीरात

विश्व अर्थव्यवस्था में दशकों से चले आ रहे अमेरिकी डॉलर के दबदबे को अब बड़ी चुनौती मिल रही है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ट्रंप सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। यूएई ने साफ कर दिया है कि यदि अमेरिका ने तुरंत ‘डॉलर सपोर्ट’ सुनिश्चित नहीं किया, तो वे तेल के व्यापार के लिए चीनी मुद्रा ‘युआन’ का रुख करेंगे।
पेट्रो-डॉलर व्यवस्था पर बढ़ता खतरा वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव के साथ हुई एक गोपनीय बैठक में स्पष्ट किया कि युद्ध के चलते डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल होता जा रहा है। 1970 के दशक से प्रभावी ‘पेट्रो-डॉलर’ व्यवस्था के लिए यह एक बड़ा संकट है। यदि डॉलर की उपलब्धता आसान नहीं हुई, तो यूएई चीनी मुद्रा को विकल्प के रूप में अपनाने के लिए मजबूर होगा।
युद्ध से भारी नुकसान और मुआवजे की मांग युद्ध की तपिश ने यूएई के ऊर्जा क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे उनका लगभग 500 मिलियन बैरल कच्चा तेल अटक गया है। इसके अलावा, तेल और गैस के बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुंची है। इस बड़े वित्तीय घाटे की भरपाई के लिए यूएई ने ट्रंप प्रशासन से भारी मुआवजे की मांग की है।
बदलता वैश्विक समीकरण वैश्विक बाजार में डॉलर का एकाधिकार कम होना अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। हाल ही में कुछ अन्य देशों द्वारा भी चीनी युआन में तेल की खरीद की गई है, जो वैश्विक व्यापार में बदलाव का संकेत है। यदि यूएई जैसा प्रभावशाली देश डॉलर छोड़कर चीनी मुद्रा का हाथ थामता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी प्रभाव को काफी हद तक कम कर देगा।
एक नजर में
- डॉलर की कमी के कारण यूएई ने तेल व्यापार के लिए चीनी युआन के उपयोग की चेतावनी दी है।
- युद्ध के कारण यूएई का लगभग 500 मिलियन बैरल कच्चा तेल फंस गया है, जिससे भारी नुकसान हुआ है।
- ऊर्जा बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के लिए यूएई ने अमेरिका से बड़े मुआवजे की मांग की है।
- यूएई का यह कदम 1970 के दशक से चली आ रही वैश्विक पेट्रो-डॉलर प्रणाली को ध्वस्त कर सकता है।
