‘हनुमान अंश’ की 435 करोड़ी सफलता के बाद आया नया तूफान! परदे पर गूंजेगी ‘न्याय के देवता’ की ललकार

धार्मिक आस्था, समृद्ध संस्कृति और भारतीय लोककथाओं पर आधारित फिल्मों के बढ़ते दौर के बीच अब उत्तराखंड के ऐतिहासिक लोकदेवता गोलू देवता की गाथा बड़े पर्दे पर पेश होने के लिए तैयार है। फिल्म का नाम ‘बाला गोरिया’ रखा गया है, जो कुमाऊं क्षेत्र में घर-घर पूजे जाने वाले ‘न्याय के देवता’ गोलू जी महाराज की अमर जीवनगाथा पर आधारित है। यह भव्य सिनेमाई प्रस्तुति ऐसे समय में दर्शकों के सामने आ रही है, जब नीम करोली बाबा के पावन जीवन से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक और अप्रत्याशित सफलता हासिल की है।
ट्रेड विश्लेषकों की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ‘हनुमान अंश’ फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 435 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। यद्यपि फिल्म की शुरुआती बॉक्स ऑफिस ओपनिंग धीमी रही थी, लेकिन मजबूत वर्ड-ऑफ-माउथ और दर्शकों के अपार भक्तिभाव के चलते फिल्म ने कमाई के नए कीर्तिमान स्थापित किए। अब ‘बाला गोरिया’ के निर्माता-निर्देशक भी इस आध्यात्मिक लहर का लाभ उठाते हुए वैसी ही विशाल सफलता की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
हालांकि, सिनेमा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों फिल्मों के परिदृश्य में थोड़ा अंतर है। ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा की कहानी दिखाई गई थी, जिनकी ख्याति देश के साथ-साथ विदेशों में भी बड़े पैमाने पर फैली हुई है। इसके विपरीत, गोलू देवता की मान्यता और प्रभाव मुख्य रूप से उत्तराखंड और कुमाऊं मंडल तक अधिक सीमित है। ऐसे में ‘बाला गोरिया’ के मेकर्स को देश के अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए व्यापक स्तर पर आक्रामक प्रमोशन और मार्केटिंग रणनीति अपनानी होगी।
प्रारंभिक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फिल्म पहले 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी। लेकिन ‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस पर जारी रिकॉर्ड तोड़ कमाई और उसके दर्शकों के बीच बने दबदबे को देखते हुए इसकी रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई है। अब इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के नवंबर महीने में रिलीज होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
फिल्म ‘बाला गोरिया’ की कथावस्तु उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के परम पूज्य लोकदेवता गोलू देवता से गहराई से जुड़ी है। स्थानीय जनमानस में उन्हें ‘गोल्ज्यू महाराज’ और साक्षात ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजा जाता है। अल्मोड़ा के प्रसिद्ध चितई मंदिर, चंपावत और घोड़ाखाल में उनके भव्य और चमत्कारी धाम स्थित हैं। पौराणिक और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जब कोई पीड़ित व्यक्ति न्याय से वंचित रह जाता है, तो वह गोलू देवता के दरबार में अपनी शिकायत और समस्याएं एक चिट्ठी में लिखकर अर्पित करता है। मनोकामना पूर्ण होने और न्याय मिलने पर श्रद्धालु मंदिर परिसर में पीतल की घंटियां चढ़ाकर अपना आभार प्रकट करते हैं।
प्राचीन लोकगाथाओं के मुताबिक, गोलू देवता का जन्म एक राजपरिवार में हुआ था। जन्म के समय से ही पारिवारिक षड्यंत्रों और रंजिशों का शिकार होने के बावजूद वह चमत्कारिक रूप से जीवित बचे और बड़े होकर अपनी सत्यनिष्ठा व निष्पक्ष न्यायप्रिया के लिए जाने गए। इसी वजह से सदियों से लोगों के मन में उनके प्रति ऐसी अटूट आस्था है कि जहां कानून की सीमाएं खत्म होती हैं, वहां से गोलू देवता का न्याय शुरू होता है। अब इस महान सांस्कृतिक विरासत को बड़े पर्दे पर देखना दर्शकों के लिए एक अद्भुत अनुभव होगा।
