पश्चिम एशिया में गहराते ईंधन संकट के बीच पश्चिम बंगाल ने चुनी इलेक्ट्रिक राह!

पश्चिम एशिया में गहराते ईंधन संकट के बीच पश्चिम बंगाल ने चुनी इलेक्ट्रिक राह!

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थितियों ने वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति में अनिश्चितता पैदा कर दी है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत में परिवहन क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है। इस संकटपूर्ण स्थिति के बीच पश्चिम बंगाल ने वैकल्पिक ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ाए हैं। राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के पंजीकरण में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जो आने वाले समय में परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

ईवी पंजीकरण में ऐतिहासिक वृद्धि

आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जहां राज्य में लगभग 52 हजार इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 1.33 लाख के करीब पहुंच गई है। महज दो वर्षों में 154.7 प्रतिशत की यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। इस बदलाव का मुख्य कारण राज्य सरकार की प्रोत्साहन नीतियां और लोगों के बीच पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता है, जो पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में सहायक सिद्ध हो रही है।

ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों का दबदबा

राज्य में इलेक्ट्रिक क्रांति की कमान मुख्य रूप से ई-रिक्शा (टोटो) ने संभाल रखी है, जिसकी कुल ईवी बाजार में 67 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में 15 प्रतिशत और चार पहिया वाहनों में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। अक्टूबर 2025 से गैर-पंजीकृत टोटो को आधिकारिक रूप से पंजीकृत करने के सरकार के निर्णय ने भी इन आंकड़ों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। हालांकि, चार्जिंग बुनियादी ढांचे की कमी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है, जिस पर भविष्य में और निवेश की आवश्यकता है।

ईंधन संकट और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन गया है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया के युद्ध जैसे हालात में जहां कच्चे तेल की कीमतों पर नियंत्रण संभव नहीं है, वहां बिजली से चलने वाली गाड़ियां परिवहन को स्थिरता प्रदान करेंगी। पश्चिम बंगाल का यह मॉडल न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा, बल्कि दीर्घकालिक रूप से आम जनता के लिए यात्रा को किफायती भी बनाएगा।

एक झलक में

  • पश्चिम एशिया युद्ध के कारण ईंधन संकट के बीच पश्चिम बंगाल में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के उपयोग में 154.7% की रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी हुई।
  • राज्य में ईवी की संख्या 52 हजार से बढ़कर लगभग 1.33 लाख तक पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।
  • कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में 67% हिस्सेदारी के साथ ई-रिक्शा (टोटो) सबसे लोकप्रिय माध्यम बनकर उभरा है।
  • पर्यावरण संरक्षण और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण लोग तेजी से ईवी को अपना रहे हैं।