क्या फिल्मों में स्मोकिंग का glorification जरूरी है? सनी देओल के नए अवतार पर छिड़ी तीखी बहस

क्या फिल्मों में स्मोकिंग का glorification जरूरी है? सनी देओल के नए अवतार पर छिड़ी तीखी बहस

फिल्मी पर्दे पर हमेशा अपने दमदार एक्शन और मुक्कों की गूंज से दर्शकों का दिल जीतने वाले बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सनी देओल एक बिल्कुल अलग और हैरान करने वाला अवतार लेकर आए हैं। अपनी आगामी फिल्म ‘सूर्या’ के मोशन पोस्टर में सनी देओल एक ऐसे बुजुर्ग के रूप में नजर आ रहे हैं, जिसके चेहरे पर गहरा अवसाद और हाथ में जलती हुई सिगरेट है। अपने अतीत के रहस्यों को तलाशने वाले इस इंटेंस लुक ने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। फिल्म के निर्देशक एम. पद्मकुमार और निर्माता कमल मुकुट हैं, जिन्होंने इससे पहले ‘गदर 2’ जैसी सुपरहिट फिल्म दी थी।

पिछले कुछ समय से सनी देओल ने अपनी पुरानी इमेज को तोड़ते हुए लीक से हटकर किरदार चुने हैं। उन्होंने साबित किया है कि वह सिर्फ एक्शन हीरो ही नहीं, बल्कि गहरी संवेदनाओं वाले कलाकार भी हैं। ‘इक्का’ और ‘बंटवारा 1947’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी इस नई छवि को तराशने की कोशिश की है। हालांकि, 12 अक्टूबर को जारी ‘सूर्या’ के मोशन पोस्टर में उन्हें जिस तरह सिगरेट का धुआं उड़ाते हुए दिखाया गया है, उसने प्रशंसकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। यह फिल्म साल 2018 की ब्लॉकबस्टर मलयालम फिल्म ‘जोसेफ’ की आधिकारिक रीमेक है, जो एक बेहतरीन क्राइम थ्रिलर है।

यह सवाल लगातार गंभीर बनता जा रहा है कि क्या सनी देओल जैसे वरिष्ठ और जिम्मेदार अभिनेता को फिल्मों में इस तरह के तंबाकू सेवन वाले दृश्यों का हिस्सा बनना चाहिए? हाल ही में यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ और रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ में अत्यधिक धूम्रपान और हिंसा को लेकर काफी आलोचनाएं झेलनी पड़ी थीं। फिल्मों में विलेन या एंटी-हरो के लिए सिगरेट का इस्तेमाल पुराना चलन रहा है, लेकिन मुख्यधारा के नायकों द्वारा इसे स्टाइल स्टेटमेंट के रूप में पेश करना समाज पर गलत असर डाल सकता है। आगामी 20 नवंबर को जब ‘सूर्या’ सिनेमाघरों में रिलीज होगी, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि सनी देओल का यह नया प्रयोग बॉक्स ऑफिस पर कितना खरा उतरता है।

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