अवैध खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार! याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की मिली सलाह

अवैध खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार! याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की मिली सलाह

मध्य प्रदेश के कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित द्वारा अवैध खनन के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करने से मना कर दिया। याचिका में भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से जुड़ी कंपनियों पर जबलपुर के सिहोरा और वन क्षेत्रों में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। देश की शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को इस मामले में राहत के लिए पहले संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

अदालत में राजनीतिक बहस पर नाराजगी सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने दावा किया कि एक मौजूदा विधायक ने जज को फोन कर प्रभावित करने की कोशिश की। इस पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत को राजनीतिक लड़ाइयों का अखाड़ा न बनाया जाए। बेंच ने कहा कि केवल राजनीतिक लाभ न मिलने की स्थिति में सीधे सुप्रीम कोर्ट आना उचित नहीं है और न्यायपालिका के सम्मान को बनाए रखना जरूरी है।

साक्ष्य और आगामी कानूनी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अनुमति दी है कि वे अपने पास मौजूद सभी सबूत हाईकोर्ट के समक्ष पेश कर सकते हैं। कोर्ट ने दोहराया कि यदि किसी ने न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की कोशिश की है, तो उसे दंडित किया जाना चाहिए, लेकिन पहले आरोपों को साबित करना होगा। अब यह मामला स्थानीय स्तर पर हाईकोर्ट के माध्यम से आगे बढ़ेगा, जिससे अवैध खनन के आरोपों की जांच का रास्ता खुला रहेगा।

एक झलक में

  • एमपी में अवैध खनन मामले में विधायक की कंपनियों के खिलाफ याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार किया।
  • सीजेआई की बेंच ने याचिकाकर्ता को साक्ष्यों के साथ हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया।
  • जज को फोन करने के आरोपों को कोर्ट ने ‘राजनीतिक बयानबाजी’ बताते हुए नाराजगी जाहिर की।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पहले हाईकोर्ट में तथ्यों को साबित करना होगा।