बिना कील और मशीन के तैयार होगा भगवान जगन्नाथ का रथ! अक्षय तृतीया पर शुरू हुआ पवित्र निर्माण

भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा की तैयारियां अक्षय तृतीया के पावन पर्व से शुरू हो गई हैं। ओडिशा के पुरी में सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखते हुए, इस वर्ष भी रथों का निर्माण बिना किसी आधुनिक मशीन या लोहे की कील के किया जा रहा है। मंत्रों से अभिमंत्रित सोने की कुल्हाड़ियों के स्पर्श के साथ इस विशाल कार्य का शुभारंभ हुआ, जो पूरी तरह से मानवीय कौशल और अटूट श्रद्धा पर आधारित है।
शास्त्रोक्त विधि और कारीगरों का समर्पण इस भव्य निर्माण कार्य में लगभग 230 विशेषज्ञ कारीगर जुटे हैं, जिनमें विश्वकर्मा महाराणा, रूपकार और चित्रकार शामिल हैं। कुल 865 लकड़ी के लट्ठों का उपयोग कर तीन विशाल रथ तैयार किए जाएंगे। इन रथों को बनाने में 79 दिन का समय लगेगा और 7 जुलाई तक इन्हें अंतिम रूप दे दिया जाएगा। निर्माण के दौरान सभी सेवायत सात्विक जीवन शैली अपनाते हैं और घर में भी लहसुन-प्याज का परहेज करते हैं।
प्राचीन तकनीक का अद्भुत संगम रथों के लिए फासी, धौरा और आसन जैसे पेड़ों की पवित्र लकड़ियों का चुनाव किया जाता है। सबसे पहले रथ के पहिए बनाए जाते हैं और उसके बाद ऊपरी ढांचा तैयार होता है। मशीनी कटर के बजाय पारंपरिक औजारों का प्रयोग इस प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग की श्रेष्ठता को दर्शाता है। यह भव्य रथयात्रा 16 जुलाई को निकाली जाएगी, जिसमें भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
एक झलक में
- अक्षय तृतीया के दिन सोने की कुल्हाड़ी के स्पर्श से रथ निर्माण की शुरुआत हुई।
- पूरे रथ के ढांचे में एक भी लोहे की कील या मशीन का प्रयोग नहीं होता है।
- 230 कारीगर 79 दिनों की कड़ी मेहनत से 865 लकड़ियों के जरिए रथ तैयार करेंगे।
- 16 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा का आयोजन होगा।
