क्या मोदी सरकार के संविधान संशोधन बिल की हार विपक्ष की बड़ी जीत है

लोकसभा में महिला आरक्षण और सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन बिल के गिरने के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी दल अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखने की योजना बना रहे हैं, जिसमें महिला आरक्षण के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए जाएंगे। विपक्ष का दावा है कि इस बिल की आड़ में सरकार देश के राजनीतिक मानचित्र और चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश कर रही थी।
संसदीय गणित और राजनीतिक झटका
संविधान संशोधन बिल को पारित करने के लिए सदन में दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी, लेकिन बिल के पक्ष में केवल 298 वोट ही पड़े। विपक्ष के 230 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया, जिसके कारण यह महत्वपूर्ण विधेयक खारिज हो गया। विपक्षी खेमा इसे मोदी सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका मान रहा है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर एक ऐसा ‘असंवैधानिक जाल’ बुन रही थी, जिससे लोकतंत्र की मूल संरचना को खतरा हो सकता था।
विपक्ष की मांग और भविष्य की राह
विपक्षी नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि वे महिलाओं के लिए आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार के वर्तमान प्रस्ताव को संविधान पर हमला मानते हैं। विपक्ष का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में गंभीर है, तो उसे 2023 के पुराने कानून को तत्काल प्रभाव से लागू करना चाहिए। सरकार के नए प्रस्ताव में 2029 तक सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन के बाद आरक्षण देने की बात कही गई थी, जिसे विपक्ष ने चुनावी ढांचे से छेड़छाड़ की साजिश करार दिया है। इस टकराव से आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट और बढ़ने के आसार हैं।
एक झलक में
- लोकसभा में संविधान संशोधन बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जिससे बिल खारिज हो गया।
- विपक्ष ने सरकार पर महिलाओं के नाम पर देश का चुनावी ढांचा बदलने की कोशिश का आरोप लगाया।
- ‘इंडिया’ गठबंधन जल्द ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महिला आरक्षण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा।
- राहुल गांधी ने बिल के गिरने को ‘संविधान की जीत’ और सरकार की ‘साजिश की हार’ बताया है।
