नया लेबर कोड लागू होने से घट जाएगी इन हैंड सैलरी!

नया लेबर कोड लागू होने से घट जाएगी इन हैंड सैलरी!

केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से लागू किए गए नए लेबर कोड ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन ढांचे और सामाजिक सुरक्षा नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन (बेसिक सैलरी) और महंगाई भत्ता (DA) उसके कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य है। शेष 50 प्रतिशत हिस्से में अन्य भत्ते शामिल किए जाएंगे। इस बदलाव का सीधा असर कर्मचारियों के बैंक खाते में आने वाली मासिक सैलरी पर पड़ेगा।

सैलरी स्ट्रक्चर और पीएफ गणना में बदलाव

नए कानून का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। अब तक कई कंपनियां बेसिक सैलरी को कम रखकर भत्तों का हिस्सा बढ़ा देती थीं, जिससे भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी में योगदान कम रहता था। अब बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ के लिए कटने वाली राशि भी बढ़ जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति का कुल वेतन 50,000 रुपये है, तो नए नियमों के तहत उसकी बेसिक सैलरी 25,000 रुपये तय होगी। इस पर 12 प्रतिशत की दर से 3,000 रुपये पीएफ कटेगा, जबकि पुराने ढांचे में यह कटौती कम होती थी।

पेंशन और ग्रेच्युटी पर पड़ने वाला सकारात्मक प्रभाव

हालांकि इस नियम से कर्मचारियों की ‘टेक होम सैलरी’ में मामूली कमी आएगी, लेकिन लंबी अवधि में यह फायदेमंद साबित होगा। बेसिक सैलरी बढ़ने से न केवल पीएफ फंड में अधिक पैसा जमा होगा, बल्कि कर्मचारी की ग्रेच्युटी राशि में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। सरकार का तर्क है कि यह कदम कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड को सुरक्षित और बड़ा बनाने के लिए उठाया गया है। यह नियम उन कर्मचारियों पर प्रभावी होगा जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से अधिक है।

एक झलक में

  • नए लेबर कोड के तहत बेसिक सैलरी कुल वेतन का 50 प्रतिशत होना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • पीएफ कटौती बढ़ने के कारण कर्मचारियों की मासिक ‘इन हैंड सैलरी’ में कमी आएगी।
  • इस बदलाव से कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड और ग्रेच्युटी की राशि में भविष्य में बड़ी बढ़ोतरी होगी।
  • यह नियम मुख्य रूप से 15,000 रुपये से अधिक मूल वेतन वाले निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर लागू होगा।