राहुल गांधी की नागरिकता विवाद में बढ़ी मुश्किलें, हाईकोर्ट ने दिया FIR दर्ज करने का आदेश

राहुल गांधी की नागरिकता विवाद में बढ़ी मुश्किलें, हाईकोर्ट ने दिया FIR दर्ज करने का आदेश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित दोहरी नागरिकता मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपों के प्रथम दृष्टया अवलोकन से संज्ञेय अपराध बनता है, इसलिए मामले की विस्तृत जांच आवश्यक है।

केंद्रीय एजेंसी करेगी मामले की जांच

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले की जांच किसी भी केंद्रीय एजेंसी को सौंप सकती है। इससे पहले रायबरेली और लखनऊ की निचली अदालतों ने इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि नागरिकता के मुद्दे पर निर्णय लेना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इन फैसलों को पलटते हुए कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है।

ब्रिटिश नागरिकता और बैकऑप्स कंपनी का विवाद

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने साल 2003 में ब्रिटेन में ‘बैकऑप्स लिमिटेड’ नामक कंपनी बनाई थी और इसके आधिकारिक दस्तावेजों में स्वयं को ब्रिटिश नागरिक बताया था। दावे के अनुसार, 2005 और 2006 के वार्षिक विवरणों में भी उनकी नागरिकता ब्रिटिश दर्ज थी। साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि राहुल गांधी का नाम ब्रिटेन की मतदाता सूची में रहा है और उन्होंने वहां की चुनावी प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया है। इन आरोपों के आधार पर उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

एक झलक में

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
  • मामला राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता और दोहरी नागरिकता विवाद से जुड़ा है।
  • कोर्ट के अनुसार आरोपों की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।
  • याचिका में ब्रिटेन की ‘बैकऑप्स लिमिटेड’ कंपनी और वहां की मतदाता सूची का हवाला दिया गया है।