लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर मतदान में हारी सरकार, विपक्ष की एकजुटता से पलटा पासा

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर मतदान में हारी सरकार, विपक्ष की एकजुटता से पलटा पासा

लोकसभा में महिला आरक्षण को जल्द प्रभावी बनाने और नई जनगणना के बिना परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने से संबंधित विधेयक वोटिंग के दौरान गिर गया है। सत्ताधारी एनडीए गठबंधन सदन में आवश्यक 326 मतों का आंकड़ा जुटाने में विफल रहा, जिसके चलते यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव खारिज हो गया। इस मतदान में कुल 489 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिसमें पक्ष में 278 और विपक्ष में 211 वोट पड़े, जो विधेयक पारित कराने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

विपक्ष का कड़ा विरोध और आपत्तियां

प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य 2029 तक महिला आरक्षण लागू करना था, जिसके लिए लोक सभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, विपक्ष ने इसे चुनावी ढांचे के साथ छेड़छाड़ करने की रणनीति बताते हुए कड़ा विरोध किया। विपक्षी दलों का तर्क है कि नई जनगणना के बिना परिसीमन की प्रक्रिया अपनाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है।

घटना का प्रभाव और राजनीतिक गतिरोध

विधेयक के गिरने से महिला आरक्षण के क्रियान्वयन की समयसीमा पर अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। सरकार का तर्क था कि यह कदम आरक्षण को तेजी से लागू करने के लिए जरूरी है, जबकि विपक्ष ने इसे अपनी बड़ी विधायी जीत बताया है। इस हंगामेदार सत्र और मतदान के बाद सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

एक झलक में

  • लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक मतदान के दौरान गिर गया।
  • सरकार को जीत के लिए 326 वोटों की जरूरत थी, लेकिन पक्ष में केवल 278 वोट ही पड़े।
  • विधेयक में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने और बिना जनगणना परिसीमन का प्रस्ताव था।
  • विपक्ष ने इसे चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश बताते हुए संशोधन का पुरजोर विरोध किया।