ट्रंप के टैरिफ़ से भारतीय फ़ार्मा निर्यात पर खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ़ार्मा उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने की घोषणा की है, जिससे भारत के जेनेरिक दवा उद्योग पर गहरा असर पड़ सकता है। भारत दुनिया का “दवाख़ाना” माना जाता है और उसने 2023-24 में करीब 28 अरब डॉलर का फ़ार्मा निर्यात किया था। इनमें से अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार है, जहां 31 प्रतिशत से अधिक दवाइयां भारत से जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की नीति में ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं को लेकर अस्पष्टता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के निदेशक अजय श्रीवास्तव ने बीबीसी से कहा, “अगर जेनेरिक दवाओं को ब्रांडेड श्रेणी में रखा गया तो भारतीय कंपनियों को बड़ा झटका लगेगा।” वहीं, विश्लेषकों का मानना है कि दवाओं पर टैरिफ़ बढ़ने से अमेरिका में भी स्वास्थ्य सेवाओं की लागत तेज़ी से बढ़ेगी। 2022 में अकेले भारतीय जेनेरिक दवाओं ने अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम को लगभग 220 अरब डॉलर की बचत करवाई थी।

फार्मा सेक्टर पर असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा। भारत की कंपनियां अमेरिका में गर्भनिरोधक गोलियों से लेकर कैंसर उपचार तक कई अहम दवाइयों की आपूर्ति करती हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ इंद्राणी बागची का कहना है कि यह टकराव पीएम मोदी की “मेक इन इंडिया” नीति और ट्रंप की “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” सोच के बीच सीधी टक्कर है। अगर टैरिफ़ लागू होता है, तो भारतीय कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन की ओर धकेला जाएगा, लेकिन वहां की ऊंची श्रम लागत उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाए रखना मुश्किल कर देगी।