कौन संभालेगा कॉर्पोरेट विरासत का भविष्य?

भारत के कॉर्पोरेट घरानों में उत्तराधिकार की प्रक्रिया ने तेज़ी पकड़ ली है। अनुमान है कि 2024 से 2030 तक करीब 125 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति अगली पीढ़ी के हाथों में जाएगी। अडानी और अंबानी से लेकर गोदरेज, मिस्त्री और नादर तक, देश के बड़े उद्योगपति अब अपने साम्राज्य की बागडोर वारिसों को सौंपने लगे हैं।

अडानी ग्रुप में करण, प्रणव, सागर और जीत पहले ही अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं, मुकेश अंबानी ने ईशा, आकाश और अनंत को क्रमशः रिटेल, टेलीकॉम और हरित ऊर्जा का नेतृत्व सौंपा है। गोदरेज परिवार ने आपसी सहमति से 127 साल पुराने साम्राज्य का बंटवारा कर लिया है, जबकि मिस्त्री परिवार ने नई पीढ़ी को रणनीतिक भूमिकाओं में शामिल किया है।

एचसीएल के संस्थापक शिव नादर ने अपनी बेटी रोशनी को पूरी तरह से कमान सौंप दी है। हालांकि, हर परिवार में यह प्रक्रिया सहज नहीं रही। मोदी ग्रुप में बीना मोदी और उनके बेटों के बीच उत्तराधिकार को लेकर कानूनी जंग जारी है। यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में भारतीय कॉर्पोरेट दुनिया में नई पीढ़ी की भूमिका निर्णायक होगी।