EPF निवेश शेयर बाजार से क्यों है बेहतर?
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को अक्सर एक सुरक्षित लेकिन कम रिटर्न वाला निवेश माना जाता है। हालांकि, हाल ही में चार्टर्ड अकाउंटेंट नितेश बुद्धदेव ने एक दिलचस्प गणना साझा की है, जिसमें यह साबित होता है कि पांच साल की अवधि में EPF, शेयर बाजार के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। खासकर तब, जब टैक्स और ब्याज की पूरी तस्वीर सामने रखी जाए।
बुद्धदेव ने उदाहरण के तौर पर दो कर्मचारियों की तुलना की। पहला कर्मचारी हर महीने ₹12,000 EPF में जमा करता है और उतना ही योगदान कंपनी करती है। पांच साल में उसका बैलेंस करीब ₹17.75 लाख हो जाता है, जो पूरी तरह टैक्स-फ्री है। वहीं, दूसरा कर्मचारी EPF छोड़कर हर महीने शेयरों में ₹20,256 निवेश करता है और 11% रिटर्न पाता है। इसके बावजूद उसका कुल निवेश पांच साल बाद सिर्फ ₹15.75 लाख तक पहुंचता है और इस पर टैक्स भी देना पड़ता है।
यही वजह है कि EPF को शेयर बाजार से आगे माना जा रहा है। EPF पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री होता है और निकासी पर भी कोई टैक्स नहीं लगता, जबकि शेयर बाजार से हुई कमाई पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि EPF को पछाड़ने के लिए निवेशक को कम से कम 16% सालाना रिटर्न चाहिए, जो लगातार पाना आसान नहीं है।
