डायलिसिस के दौरान पानी पीने में छोटी सी चूक बन सकती है हार्ट अटैक की वजह!

डायलिसिस के दौरान पानी पीने में छोटी सी चूक बन सकती है हार्ट अटैक की वजह!

जब किडनी सही से काम नहीं करती, तो शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकल पाता। डायलिसिस के बीच के समय में यदि शरीर में अधिक तरल पदार्थ जमा हो जाए, तो यह फेफड़ों और हृदय पर भारी दबाव डालता है। इससे सांस लेने में तकलीफ और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो अंततः हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं।

तरल पदार्थ की सही मात्रा आमतौर पर डायलिसिस मरीजों को दिन भर में केवल 500 से 700 मिलीलीटर तरल लेने की सलाह दी जाती है। इसका सटीक गणित है: पिछले 24 घंटे की कुल यूरिन मात्रा + 500 मिलीलीटर पानी। ध्यान रहे कि तरल पदार्थ में केवल सादा पानी ही नहीं, बल्कि चाय, दाल, सूप और बर्फ भी शामिल हैं।

प्यास और वजन पर नियंत्रण ज्यादा प्यास से बचने के लिए भोजन में नमक की मात्रा कम करनी चाहिए। प्यास लगने पर पानी के बजाय बर्फ का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखना फायदेमंद होता है। मरीजों को रोजाना अपना वजन मापना चाहिए ताकि दो डायलिसिस सत्रों के बीच वजन का अंतर 2 किलो से अधिक न हो।

एक झलक में

  • शरीर में जमा अतिरिक्त पानी हृदय के लिए जानलेवा हो सकता है।
  • पानी की सही मात्रा: 24 घंटे का यूरिन आउटपुट + 500 मिलीलीटर।
  • चाय, सूप और अन्य तरल पदार्थों को भी इस सीमित कोटे में गिनें।
  • दो डायलिसिस के बीच वजन का बढ़ना 2 किलो से कम रखें।