बार-बार मूड स्विंग? ये हो सकता है ‘साइलेंट स्ट्रोक’ का संकेत

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि बार-बार मूड स्विंग, भूलने की आदत और अचानक थकान महसूस होना ‘साइलेंट स्ट्रोक’ का शुरुआती संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या बिना किसी स्पष्ट लक्षण के मस्तिष्क को धीरे-धीरे प्रभावित करती है। सामान्य ब्रेन स्ट्रोक के विपरीत, इसमें न तो बोलने में दिक्कत होती है, न ही शरीर का कोई हिस्सा सुन्न पड़ता है—इसलिए इसे पहचानना कठिन होता है।

गবেষकों के अनुसार, साइलेंट स्ट्रोक मस्तिष्क की छोटी रक्तनलिकाओं में रुकावट के कारण होता है। उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, अधिक कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और उम्र बढ़ने से इन नलिकाओं में ब्लॉकेज बनने की संभावना बढ़ जाती है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाएं धीरे-धीरे निष्क्रिय हो जाती हैं, जो आगे चलकर डिमेंशिया या बड़े स्ट्रोक का खतरा पैदा करती हैं।

चिकित्सक सलाह देते हैं कि नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना बेहद जरूरी है। साथ ही नमक और वसा का सेवन कम करें, रोज़ाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक व्यायाम करें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें। समय पर एमआरआई या सीटी स्कैन कराना साइलेंट स्ट्रोक के खतरे को जल्दी पहचानने में मदद कर सकता है।