हजरतबल दरगाह में राष्ट्रीय प्रतीक विवाद ने बढ़ाया तनाव
श्रीनगर। हजरतबल दरगाह में प्रार्थना हॉल के बाहर संगमरमर की पट्टिका पर उकेरे गए राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को लेकर विवाद गहरा गया है। हाल ही में इसे कुछ लोगों ने आपत्तिजनक बताते हुए क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने 26 लोगों को हिरासत में लिया है। इस घटना से न सिर्फ स्थानीय तनाव बढ़ा है बल्कि राजनीतिक और कानूनी बहस भी शुरू हो गई है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय प्रतीकों का प्रयोग केवल सरकारी संस्थानों या आयोजनों तक सीमित रहना चाहिए, क्योंकि इन्हें किसी विशेष धर्म से जोड़ना संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि The State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 के तहत अशोक स्तंभ का धार्मिक या निजी प्रयोग दंडनीय अपराध है, जिसमें दो साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
हजरतबल दरगाह का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह 17वीं शताब्दी से जुड़ा स्थल है, जहां पैगंबर मोहम्मद साहब की दाढ़ी का बाल सुरक्षित रखा गया है। ऐसे पवित्र स्थान पर राष्ट्रीय प्रतीक का प्रयोग सवाल खड़े करता है, क्योंकि इससे उसकी सार्वभौमिकता और गरिमा प्रभावित हो सकती है। कानूनविदों का मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों को सार्वजनिक जीवन में सम्मान देने के लिए इन्हें धार्मिक पहचान से अलग रखना आवश्यक है।
