जन्म से पहले ही पता चलेगा बच्चे की किडनी की बीमारी
कोलकाता के चिकित्सा विशेषज्ञों ने दावा किया है कि अब गर्भावस्था के दौरान शिशु की किडनी बीमारी का पता लगाया जा सकता है। इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (ईस्टर्न ज़ोन) और इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के पेडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी विभाग की संयुक्त संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भ के 22वें सप्ताह में किए जाने वाले एंटी-नेटल स्कैन से भ्रूण की किडनी में किसी भी प्रकार की जन्मजात विकृति या बीमारी का प्रारंभिक पता लगाया जा सकता है।
कार्यक्रम में मौजूद आईपीजीएमईआर की नोडल अधिकारी डॉ. सुचित्रा मुखोपाध्याय ने बताया कि अब पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में भी दुर्लभ किडनी बीमारियों के लिए जेनिटिक टेस्ट मुफ्त किए जा रहे हैं। इससे यह निर्धारित किया जा सकता है कि आने वाले समय में बच्चे में किडनी संबंधी समस्या विकसित होने की कितनी संभावना है। उन्होंने बताया कि “नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज” के तहत मरीजों को महंगी दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पेडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजीव सिन्हा ने कहा कि करीब 80% बाल्यावस्था की किडनी बीमारियाँ आनुवंशिक होती हैं। उनका कहना था, “यदि परिवार में पहले किसी सदस्य को किडनी की समस्या रही है, तो अगली पीढ़ी में भी इसका खतरा बना रहता है।” विशेषज्ञों ने यह भी जोर दिया कि जेनिटिक टेस्टिंग और परामर्श से समय रहते बीमारी की रोकथाम संभव है और इससे कई परिवारों को गंभीर स्वास्थ्य संकट से बचाया जा सकता है।
