एआई तकनीक से मृत प्रियजनों से संवाद संभव?

लंदन स्थित किंग्स कॉलेज और कार्डिफ़ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नई एआई तकनीक पर अध्ययन किया है, जो मृत व्यक्तियों की आवाज़ और व्यक्तित्व की नकल कर सकती है। इस तकनीक के ज़रिए उपयोगकर्ता अपने दिवंगत प्रियजनों के डिजिटल संस्करण से बातचीत कर सकते हैं। शोध में पाया गया कि यह तकनीक भावनात्मक रूप से राहत देने वाली होने के साथ-साथ असहज अनुभव भी करा सकती है।

एआई द्वारा बनाए गए ‘वॉइस अवतार’ अब ऐसी प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर सकते हैं जो मृत व्यक्ति की बोलने की शैली और भाव को दोहराती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक एक तरह से “माया संवाद” की तरह काम करती है—जहाँ स्मृतियाँ सिर्फ़ संरक्षित नहीं रहतीं, बल्कि संवाद के रूप में जीवंत हो उठती हैं। हालांकि, नैतिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से इसके प्रभावों को लेकर विशेषज्ञों में मतभेद है।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से शोक प्रक्रिया जटिल हो सकती है, जबकि समर्थक इसे “स्मृति संरक्षण की नई दिशा” बता रहे हैं। ‘डेथबॉट’ कहलाने वाले इन डिजिटल अवतारों ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या एआई वास्तव में इंसानी भावनाओं की सीमाओं को पार कर सकता है, या यह सिर्फ़ तकनीकी भ्रम है।