मानसिक तनाव बन रहा है आपकी हड्डियों का दुश्मन!

मानसिक तनाव बन रहा है आपकी हड्डियों का दुश्मन!

शरीर की सभी २०६ हड्डियों की मजबूती के लिए केवल कैल्शियम और विटामिन ही काफी नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मानसिक स्वास्थ्य ठीक न हो, तो हड्डियों का कैल्शियम तेजी से कम होने लगता है। पुणे के वेंसर अस्पताल के डॉक्टर समीर पाटिल ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक रहने वाला तनाव और चिंता हड्डियों की मरम्मत प्रक्रिया को बाधित कर सकती है, जिससे वे अंदर से खोखली हो सकती हैं।

हड्डियों पर स्ट्रेस हार्मोन का हमला जब हम तनाव लेते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन न केवल कैल्शियम के अवशोषण को रोकता है, बल्कि हड्डियों के घनत्व (डेंसिटी) को भी कम करता है। इसके कारण ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। खासकर महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

मांसपेशियों में अकड़न और खराब पोस्चर तनाव का पहला संकेत गर्दन, कंधों और पीठ में खिंचाव के रूप में दिखता है। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर का पोस्चर बिगड़ जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि हड्डियों को बचाने के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट, योग, गहरी सांस लेने के व्यायाम और संतुलित आहार को जीवनशैली में शामिल करना अनिवार्य है।

एक झलक में

  • तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल बढ़ने से हड्डियों का कैल्शियम कम होने लगता है।
  • लगातार चिंता से हड्डियों के टूटने (फ्रैक्चर) और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ता है।
  • गर्दन और पीठ में अकड़न तनाव का प्रारंभिक शारीरिक लक्षण है।
  • योग, ध्यान और पर्याप्त नींद हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं।