क्या पार्टनर को खुश करने के चक्कर में आप अपनी पहचान तो नहीं खो रहे? अनजाने में ‘ईजी पार्टनर’ बनकर कहीं आप मुसीबत को तो नहीं न्योता दे रहे?

अपने पार्टनर को खुश रखने और झगड़ों से बचने के लिए अपनी इच्छाओं का गला घोंटना ‘ईजी पार्टनर’ सिंड्रोम कहलाता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह आदत ऊपर से शांतिपूर्ण लग सकती है, लेकिन यह वास्तव में एक मानसिक जाल है। अपनी भावनाओं को दबाने से मन में कड़वाहट पैदा होती है जो अंततः रिश्ते के टूटने का कारण बन सकती है।
व्यक्तित्व पर पड़ता बुरा असर
जब कोई व्यक्ति खोने के डर से हर बात पर ‘हाँ’ कहता है, तो उसका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान खत्म होने लगता है। इससे रिश्ता एकतरफा हो जाता है और पार्टनर को आपकी वास्तविक स्थिति का पता ही नहीं चलता। धीरे-धीरे यह स्थिति मानसिक दूरी और कुंठा को जन्म देती है।
समानता ही है असली प्यार
विशेषज्ञों का मानना है कि विवाद से बचने के बजाय खुलकर बातचीत करना अधिक जरूरी है। अपनी नापसंदगी को शालीनता से व्यक्त करना और अपनी जरूरतों को महत्व देना एक स्वस्थ रिश्ते के लिए अनिवार्य है। खुद को खोकर किसी को थामे रखना प्यार नहीं, बल्कि दम घोंटने जैसा है।
एक झलक में
- पार्टनर की हर बात चुपचाप मान लेना ‘ईजी पार्टनर’ सिंड्रोम का संकेत है।
- यह आदत व्यक्ति के आत्मसम्मान और व्यक्तित्व को पूरी तरह खत्म कर सकती है।
- अपनी भावनाएं दबाने से भविष्य में बड़े मानसिक टकराव की संभावना रहती है।
- एक सफल रिश्ते के लिए खुलकर संवाद और अपनी बात रखना बेहद जरूरी है।
