विकसित भारत की रूपरेखा पर अयोध्या से पीएम का बड़ा संदेश

अयोध्या में राममंदिर परिसर में ध्वजारोहण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 से पहले विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया। समारोह में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। पीएम ने कहा कि यह ध्वजा केवल परंपरा का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता के पुनर्जागरण की निशानी है। उनके शब्दों में, “आज सदियों की प्रतीक्षा पूरी हुई है, और यह ध्वजा हमारे सामूहिक संकल्प का स्मरण कराता है।”

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जोर दिया कि रामराज्य की भावना न्याय, करुणा और समता पर आधारित है, और आगामी वर्षों में देश को इन्हीं मूल्यों पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीते दशक में महिलाओं, युवाओं, किसानों और वंचित समुदायों को विकास के केंद्र में रखा गया है। उनके अनुसार, अयोध्या अब सामाजिक समानता और सांस्कृतिक समन्वय का मॉडल बनकर उभर रही है, जिसने स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दी है।

मोदी ने आशा जताई कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था की शीर्ष श्रेणी में पहुंचेगा, और यह यात्रा विकसित भारत के लक्ष्य को और मजबूत करेगी। वहीं नए स्थापित मंदिर ध्वज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके प्रतीकों को भी विशेष महत्व दिया गया, जिसे विशेषज्ञ भारत की प्राचीन परंपरा से जुड़ा हुआ मानते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले अयोध्या से यह संदेश सत्तारूढ़ दल के लिए अहम संकेत देता है।