मोदी का झालमुड़ी खाना महज एक नाटक! कैमरे की मौजूदगी पर ममता बनर्जी का बड़ा हमला

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सड़क किनारे दुकान पर ‘झालमुड़ी’ खाने को एक पूर्व-नियोजित नाटक करार दिया है। मुरारई में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए ममता ने आरोप लगाया कि यह कोई अचानक की गई यात्रा नहीं थी, बल्कि चुनावी लाभ के लिए तैयार की गई एक सोची-समझी स्क्रिप्ट थी।
कैमरे और स्क्रिप्ट पर सवाल ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर यह दौरा अचानक था, तो दुकान के अंदर पहले से कैमरे कैसे तैयार थे? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की जेब में दस रुपये का नोट दिखना और विभिन्न कैमरा एंगल से शूटिंग होना, यह सब एसपीजी सुरक्षा कर्मियों की देखरेख में किया गया एक मंचन है। तृणमूल कांग्रेस ने इसे सोशल मीडिया पर प्रचार पाने का एक सस्ता जरिया बताया है।
राजनीतिक विवाद और प्रभाव इस घटना का असर राजनीतिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। टीएमसी का आरोप है कि प्रधानमंत्री के इस अचानक ठहराव के कारण झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी के हेलीकॉप्टर को उतरने की अनुमति नहीं मिली, जिससे उन्हें अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। मतदान से ठीक पहले इस ‘झालमुड़ी कांड’ ने बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज कर दिया है।
एक झलक में
- ममता बनर्जी ने पीएम मोदी के झालमुड़ी खाने के वीडियो को ‘स्क्रिप्टेड’ बताया।
- दुकान के भीतर कैमरों की मौजूदगी पर उठाए गंभीर सवाल।
- पीएम के कार्यक्रम के कारण हेमंत सोरेन की रैली रद्द होने का लगाया आरोप।
- चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने का पैंतरा करार दिया।
