क्या निकाय चुनाव में टीएमसी के बागी नेताओं को टिकट देगी बीजेपी? दिलीप घोष के बयान से सियासत में भूचाल!

क्या निकाय चुनाव में टीएमसी के बागी नेताओं को टिकट देगी बीजेपी? दिलीप घोष के बयान से सियासत में भूचाल!

कोलकाता नगर निगम समेत पश्चिम बंगाल के विभिन्न नगर निकायों के आगामी चुनावों को लेकर राज्य का राजनीतिक तापमान अचानक बेहद बढ़ गया है। इस समय राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा बीजेपी की संभावित उम्मीदवार सूची को लेकर हो रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या बीजेपी इस बार टीएमसी के पूर्व पार्षदों या उनके प्रभावशाली परिवारों के सदस्यों को टिकट देकर मैदान में उतारेगी? कोलकाता के टीएमसी के कई बड़े नेताओं के करीबियों और रिश्तेदारों को बीजेपी का टिकट मिलने की खबरों ने पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच भारी खलबली और असंतोष पैदा कर दिया है।

इन तमाम अटकलों और अंदरूनी खींचतान के बीच शनिवार सुबह राज्य के पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने अपनी चुप्पी तोड़ी। बाहरी नेताओं को तरजीह दिए जाने के सवालों का दोटूक जवाब देते हुए दिलीप घोष ने कहा, “बाजार में अफवाहों का बाजार हमेशा गर्म रहता है। असल हकीकत क्या है, यह तो आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होने के बाद ही साफ हो पाएगी। भारतीय जनता पार्टी के पास समर्पित नेताओं और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की कोई कमी नहीं है कि हमें सब कुछ बाहर से लाकर टिकट बांटना पड़े। एक समय परिस्थितियां अलग थीं, तब हमने जरूरत के हिसाब से लोगों को शामिल किया था। लेकिन आज हमारे मूल कार्यकर्ता वर्षों से जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं, उनके पास अपार अनुभव है और जनता उनकी साफ-सुथरी छवि को पसंद करती है। पार्टी टिकट बांटते समय अपने पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं के हितों का पूरा ध्यान रखेगी।”

दूसरी तरफ, निकाय चुनावों में सत्ताधारी ममता तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा किसी संभावित राजनीतिक गठबंधन की खबरें भी चर्चा में थीं, लेकिन वह योजना अमल में नहीं आ सकी। विपक्षी वोटों के बिखराव से बीजेपी को मिलने वाले चुनावी फायदे के सवाल पर दिलीप घोष ने विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “अगर विरोधियों को अलग-अलग ही चुनाव लड़ना था, तो बंद कमरों में बड़ी-बड़ी बैठकें करने का क्या फायदा हुआ? इसमें बीजेपी के किसी फायदे या नुकसान का सवाल ही नहीं उठता। विधानसभा चुनावों में भी ये सभी विरोधी दल एकजुट होकर हमारे खिलाफ लड़े थे, लेकिन जनता ने बीजेपी पर ही अपना भरोसा जताया था। कोलकाता नगर निगम समेत बाकी सभी नगर पालिकाओं के चुनावों में भी यही परिणाम दोहराया जाएगा। राज्य की जनता ने देख लिया है कि इन लोगों को सत्ता सौंपने का मतलब सिर्फ लूटपाट को बढ़ावा देना है। बंगाल की जनता अब वास्तविक विकास, सुशासन और पारदर्शी राजनीति चाहती है, जो केवल भारतीय जनता पार्टी ही दे सकती है।”

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