LPG उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम और कालाबाजारी पर सरकार का कड़ा प्रहार

घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर केंद्र सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि देश में एलपीजी का उत्पादन अब उस स्तर तक पहुंच चुका है, जहां अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली किसी भी हलचल या संकट का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। इस कदम से अब शहर और गांव, दोनों ही क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की कमी की चिंता समाप्त हो जाएगी और लोगों को बुकिंग के लिए अब भागदौड़ करने की आवश्यकता नहीं होगी।
कालाबाजारी रोकने के लिए सुरक्षा तंत्र
वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (DAC) यानी ओटीपी सिस्टम को सख्ती से लागू कर दिया है। इस डिजिटल सुरक्षा कवच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाला सिलेंडर केवल उसी उपभोक्ता तक पहुंचे जिसने उसकी बुकिंग की है। अब बिना ओटीपी साझा किए सिलेंडर की डिलीवरी संभव नहीं होगी, जिससे बिचौलियों और अवैध रिफिलिंग करने वालों के नेटवर्क पर लगाम कसेगी।
लक्ष्य के करीब पहुंचती वितरण प्रणाली
सरकार ने इस नई प्रणाली के जरिए 92 प्रतिशत तक सफलता दर हासिल कर ली है। इसका सीधा अर्थ है कि अब देश के अधिकांश हिस्सों में सिलेंडर की सुपुर्दगी पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित हो चुकी है। उत्पादन में वृद्धि और वितरण में कड़ाई का यह मिला-जुला असर आने वाले समय में एलपीजी की सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाएगा, जिससे आम आदमी को समय पर सिलेंडर मिलना सुनिश्चित होगा।
एक झलक में
- घरेलू एलपीजी उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि से बाहरी संकटों का असर होगा बेअसर।
- कालाबाजारी रोकने के लिए ओटीपी (DAC) सिस्टम को किया गया अनिवार्य।
- वितरण में पारदर्शिता का 92 प्रतिशत लक्ष्य हुआ पूरा, अब असली हकदार को ही मिलेगा सिलेंडर।
- बुकिंग और डिलीवरी के लिए उपभोक्ताओं को नहीं करनी होगी भागदौड़।
