ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत 131वें स्थान पर
नई दिल्ली: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की हालिया ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स रिपोर्ट ने एक बार फिर भारत में लैंगिक असमानता की सच्चाई को उजागर किया है। 146 देशों की सूची में भारत इस बार 131वें स्थान पर पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में दो स्थान नीचे है। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को छोड़ अन्य सभी क्षेत्रों—शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीतिक प्रतिनिधित्व—में भारत ने कोई विशेष सुधार नहीं किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट भारत की नीति निर्माण में महिला-संवेदनशीलता की कमी को दर्शाती है। सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक डॉ. रंजना कुमारी ने कहा, “महिलाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सिर्फ नारों से सामाजिक बदलाव संभव नहीं होता।” दक्षिण एशिया में भारत की रैंकिंग भी चिंताजनक है—जहाँ बांग्लादेश 24वें स्थान पर, वहीं नेपाल और श्रीलंका क्रमशः 125वें और 130वें स्थान पर हैं।
हालाँकि, आर्थिक भागीदारी के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति में मामूली सुधार हुआ है। लेकिन यह सुधार अन्य देशों की तीव्र प्रगति की तुलना में काफी धीमा रहा। रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक सशक्तिकरण में भी भारत की स्थिति स्थिर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रतिनिधित्व जैसे मूल क्षेत्रों में ठोस नीतिगत बदलाव नहीं लाए गए, तो लैंगिक समानता का लक्ष्य और भी दूर होता जाएगा।
