ब्रह्मोस रणनीति से उभरती नई मिसाइल जरूरत

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की सटीक मार ने पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों को झकझोर दिया और भारत की रणनीति को नई दिशा दी। सिर्फ 20 मिनट चले इस हमले में भारतीय वायुसेना ने दर्जनों हाई-वैल्यू ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पाकिस्तान की कमान उलझ गई। राणा सनाउल्लाह के अनुसार, पाकिस्तान को मिसाइलों के आने की चेतावनी मुश्किल से आधा मिनट पहले मिली, जिसने उनकी रणनीतिक कमजोरी को उजागर कर दिया।
ब्रह्मोस की Mach 3 रफ्तार और उच्च सटीकता ने उसे ऑपरेशन का केंद्र बना दिया, लेकिन इसकी एक सीमित क्षमता भी सामने आई—उच्च कीमत और कम उत्पादन दर। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने महंगे मिसाइल सिस्टम पर अत्यधिक निर्भरता बड़े संघर्षों में चुनौती बन सकती है। भारत हर साल सीमित संख्या में ब्रह्मोस तैयार करता है, जिससे लंबी अवधि वाले अभियान में इसका उपयोग कठिन हो जाता है।
यही वजह है कि रक्षा विश्लेषक अब दोहरी रणनीति की वकालत कर रहे हैं। उनके अनुसार, ब्रह्मोस जैसे सर्जिकल हथियार के साथ भारत को ऐसी मिसाइल भी चाहिए जो संख्या के बल पर दुश्मन की एयर डिफेंस को दबा सके। यूक्रेन की फ्लेमिंगो मिसाइल का उदाहरण बताते हुए वे कहते हैं कि अधिक संख्या, लंबी रेंज और कम लागत भविष्य के युद्धों की दिशा तय करेंगे। उभरती स्थिति संकेत देती है कि भारत को अब “स्कैलपेल” के साथ “हथौड़ा” भी चाहिए।
