विश्व बाजार में भारतीय गेहूं का जलवा बरकरार रखते हुए मोदी सरकार ने 25 लाख टन अतिरिक्त निर्यात को दी मंजूरी

भारतीय गेहूं की वैश्विक मांग को पूरा करने और देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार को सरकार ने अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात की विशेष अनुमति प्रदान की। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की व्यापारिक स्थिति मजबूत होगी और साथ ही किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा।
बंपर पैदावार और निर्यात के लाभ
देश में इस सीजन में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार हुई है, जिससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद भी सरकारी गोदामों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की कमी को देखते हुए वाणिज्य मंत्रालय इस अवसर का लाभ उठाकर विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना चाहता है। विशेष रूप से पड़ोसी देशों और मध्य पूर्व में भारतीय गेहूं की भारी मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा
इस निर्णय का सीधा लाभ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के गेहूं उत्पादक किसानों को मिलेगा। निर्यात के रास्ते खुलने से खुले बाजार में गेहूं की कीमतों में सुधार होगा, जिससे किसानों का मुनाफा बढ़ना तय है। हालांकि, निर्यात में ढील देने के साथ-साथ सरकार घरेलू खाद्य सुरक्षा पर भी पैनी नजर रख रही है ताकि स्थानीय बाजार में कीमतें स्थिर रहें और आम जनता पर बोझ न पड़े।
एक झलक में
- केंद्र ने 25 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त गेहूं निर्यात की विशेष अनुमति दी।
- बंपर पैदावार और पर्याप्त बफर स्टॉक के कारण लिया गया अहम फैसला।
- पंजाब, हरियाणा और यूपी के किसानों की आय में वृद्धि होने की संभावना।
- निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सरकार का जोर।
