समुद्र में ईरान की ‘मॉस्किटो फ्लीट’ का खौफ और उसकी अचूक मारक क्षमता

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की ‘मॉस्किटो फ्लीट’ एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गई है। पारंपरिक नौसैनिक शक्ति के विपरीत, ईरान ने भारी-भरकम युद्धपोतों के बजाय सैकड़ों छोटी और बेहद तेज रफ्तार नावों का एक ऐसा जाल तैयार किया है, जो बड़े से बड़े दुश्मन को चुनौती देने में सक्षम है। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा संचालित यह बेड़ा सीधे टकराव के बजाय ‘असममित युद्ध’ (Asymmetric Warfare) की रणनीति पर काम करता है, जहाँ गति और संख्या ही सबसे बड़ा हथियार बन जाती है।
रफ्तार और खतरनाक ‘झुंड’ रणनीति
इस फ्लीट की सबसे बड़ी ताकत इसकी अविश्वसनीय फुर्ती है। ये नावें सामान्यतः 40 से 60 समुद्री मील की गति से चलती हैं, जबकि कुछ आधुनिक संस्करण 100 समुद्री मील की रफ्तार तक पहुँच सकते हैं। युद्ध के समय ये नावें अकेले हमला करने के बजाय ‘स्वार्म’ यानी झुंड बनाकर हमला करती हैं। जब सैकड़ों तेज रफ्तार नावें एक साथ किसी एक बड़े युद्धपोत को घेरती हैं, तो दुश्मन की आधुनिक रक्षा प्रणालियों के लिए इतने सारे लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक करना और उन्हें बेअसर करना लगभग असंभव हो जाता है।
घातक हथियारों से लैस छोटा बेड़ा
आकार में छोटी होने के बावजूद ये नावें विनाशकारी हथियारों से लैस हैं। इनमें जहाज-रोधी मिसाइलें, रॉकेट लॉन्चर और भारी मशीन गन लगी होती हैं। इसके अलावा, ईरान ने इन नावों को समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने और कामिकाजे ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता से भी जोड़ा है। इस बेड़े के साथ छोटी पनडुब्बियों का तालमेल पानी के नीचे से भी गुप्त हमले सुनिश्चित करता है, जो किसी भी नौसैनिक बेड़े के लिए रणनीतिक दुःस्वप्न साबित हो सकता है।
एक झलक में
- ईरान की मॉस्किटो फ्लीट सैकड़ों छोटी और अत्यधिक तेज रफ्तार नावों का एक बेड़ा है।
- यह बेड़ा ‘स्वार्मिंग’ तकनीक का उपयोग कर दुश्मन की डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर देता है।
- ये नावें एंटी-शिप मिसाइलों, रॉकेट लॉन्चरों और कामिकाजे ड्रोन से लैस होती हैं।
- इसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जैसे संकीर्ण समुद्री क्षेत्रों में बड़े युद्धपोतों को रोकना और अचानक हमला करना है।
