अमेरिका-चीन टैरिफ टला, क्यों जरूरी है चीन ट्रंप के लिए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ 90 दिनों के लिए टालने का फैसला किया है, जिससे दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को अस्थायी राहत मिली है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि अमेरिका-चीन टैरिफ की नई समयसीमा अब 9 नवंबर होगी। इस फैसले के पीछे अमेरिका की चीन पर गहरी व्यापारिक निर्भरता और घरेलू आर्थिक दबाव अहम कारण माने जा रहे हैं।
व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि चीन सस्ते श्रम, बड़े पैमाने की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और मजबूत सप्लाई चेन के चलते अमेरिकी बाजार के लिए अपरिहार्य है। अमेरिकी कंपनियों का चीन में बड़ा निवेश भी इस निर्भरता को और गहरा करता है। यूएस-चाइना बिजनेस काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा टैरिफ विवाद के बावजूद 48% अमेरिकी कंपनियां इस साल भी चीन में निवेश की योजना बना रही हैं, हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।
2001 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शामिल होने के बाद चीन अमेरिकी कंपनियों के लिए एक प्रमुख उत्पादन केंद्र बन गया। अमेरिका जहां हाई-टेक और उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण पर ध्यान देता है, वहीं कम लागत वाले सामानों के लिए चीन पर निर्भर है। इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने, फर्नीचर और कंज्यूमर गुड्स जैसे उत्पाद अमेरिका में चीन से आयात होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में ढील, दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को अल्पकालिक स्थिरता प्रदान कर सकती है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए व्यापार संतुलन पर ठोस कदम जरूरी हैं।
