भारत में रूसी तेल आयात पर सरकारी–निजी कंपनियों में फासला

भारत के तेल बाज़ार में रूसी तेल को लेकर साफ विभाजन नज़र आ रहा है। सरकारी कंपनियों ने सितंबर में आयात घटाया, जबकि निजी रिफाइनर खरीद बढ़ाते दिखे। ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक, यह रुख अमेरिकी दबाव और कम होती छूट से जुड़ा है, जिसने सरकारी कंपनियों को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर किया है।

केप्लर की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में सरकारी कंपनियों का रूसी तेल आयात औसतन 6.05 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो अप्रैल-अगस्त के औसत से 32% कम है। वहीं, निजी रिफाइनरों ने इसी अवधि में 9.79 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल आयात किया, जो पिछले महीनों से अधिक है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी रिफाइनर अपनी बड़ी घरेलू जिम्मेदारी के चलते सुरक्षा और विविधता को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि निजी कंपनियां मुनाफ़े के लिए अधिक लचीलापन अपनाती हैं।

रिलायंस और नायरा एनर्जी जैसी कंपनियां अभी भी रूसी कच्चे तेल पर निर्भर हैं। विशेषकर रिलायंस को रोसनेफ्ट के साथ हुई लंबी अवधि की डील से अधिक छूट मिलती है, जो इसे लाभप्रद बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही सरकारी खरीद में कमी आई हो, रूसी तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए किफायती विकल्प बना हुआ है और फिलहाल आयात रणनीति में केंद्रीय भूमिका निभाता रहेगा।