मोदी-जिनपिंग मुलाकात ने बढ़ाई कूटनीतिक हलचल

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 40 मिनट की बैठक ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सात वर्षों बाद चीन की यात्रा पर पहुंचे मोदी ने जिनपिंग के साथ ऐसे समय पर संवाद किया है, जब अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव चरम पर है और वैश्विक आर्थिक सुस्ती को लेकर आशंकाएँ बढ़ी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बैठक पिछली कज़ान वार्ता की निरंतरता है। 2018 के वुहान संवाद के बाद भारत-चीन रिश्ते डोकलाम विवाद के कारण तनावपूर्ण रहे थे, लेकिन इस बार माहौल अलग है। ट्रम्प प्रशासन की नीतियों और हालिया शुल्क विवाद ने बीजिंग और नई दिल्ली को अपने संबंधों को नया आकार देने पर मजबूर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन भारत को अमेरिकी गठजोड़ से दूर करने की कोशिश कर सकता है, लेकिन भारत को इस संभावित रणनीति के प्रति सतर्क रहना होगा।

एससीओ की 25वीं बैठक के दौरान मोदी, जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उपस्थिति को वॉशिंगटन के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। विशेषकर हाल में अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत पर रूस से तेल खरीद को लेकर की गई आलोचनाओं ने इस त्रिकोणीय मुलाकात को और अहम बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि एशियाई राष्ट्र अब साझा हितों को प्राथमिकता देते हुए अमेरिकी दबाव से स्वतंत्र कूटनीतिक रास्ता अपनाने की ओर बढ़ सकते हैं।