H1-B वीजा शुल्क बढ़ोतरी से भारतीय IT कंपनियों पर संकट
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा H1-B वीजा आवेदन शुल्क को लगभग दस गुना बढ़ाकर 100,000 डॉलर तक कर दिया गया है। इस फैसले से भारतीय आईटी दिग्गज कंपनियां जैसे TCS, इंफोसिस, HCLTech और विप्रो पर गहरा वित्तीय दबाव आने वाला है। पहले जहां एक वीजा की कुल लागत 7,500 से 10,000 डॉलर होती थी, वहीं अब कंपनियों को लाखों रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ी हुई लागत का सीधा असर आईटी कंपनियों की कमाई और मार्जिन पर पड़ेगा। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इन कंपनियों को 150 से 550 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना होगा। आईटी इंडस्ट्री विश्लेषक विवेक शर्मा ने कहा, “भारतीय कंपनियों की कमाई का 85% अमेरिकी बाजार से आता है। ऐसे में यह फैसला उनकी रणनीति और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों को चुनौती देगा।”
लागत कम करने के लिए कंपनियां ऑफशोरिंग और स्थानीय नियुक्तियों पर जोर दे सकती हैं। हालांकि, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड आर्किटेक्चर जैसे कामों के लिए ऑनसाइट कर्मचारियों की जरूरत बनी रहेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे 2025 तक करीब 13 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है और उद्योग की EBITDA में 7–15% की गिरावट देखने को मिल सकती है।
