भारत ने तालिबान के साथ खड़ा होकर ट्रंप की चेतावनी को किया खारिज

मॉस्को में आयोजित सातवें ‘मॉस्को फॉर्मेट’ सम्मेलन में भारत ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बगराम एयरबेस से जुड़ी चेतावनी को अस्वीकार करते हुए अफगानिस्तान की संप्रभुता का समर्थन किया। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका ने यह एयरबेस तालिबान को “मुफ्त में दे दिया” और अब इसे वापस चाहता है। इसके जवाब में तालिबान प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुझाहिद ने साफ किया कि वे किसी भी विदेशी शक्ति को अपनी जमीन नहीं देंगे।

भारत ने सम्मेलन में सीधे बगराम एयरबेस का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान की स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में भारत सहित रूस, चीन, ईरान, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देशों ने भाग लिया। इस मंच पर तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की पहली आधिकारिक उपस्थिति भी रही, जिसे भारत ने “संवाद का अवसर” बताया।

भारत ने अब तक तालिबान को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन उसने अफगानिस्तान में मानवीय सहायता, स्वास्थ्य और कृषि परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग बढ़ाया है। मुत्ताकी 9 से 16 अक्टूबर के बीच भारत की यात्रा पर होंगे, जो दोनों पक्षों के बीच भरोसे और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। भारत का यह रुख संकेत देता है कि वह धमकी की राजनीति नहीं, बल्कि संवाद के ज़रिए समाधान को प्राथमिकता दे रहा है।